दो दिवसीय सम्मेलन में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, शिक्षकों की भूमिका और 2026 तक राजस्थान शिक्षा प्रणाली को नए आयाम देने पर जोर

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सालासर स्थित चमेली देवी सभागार में दो दिवसीय राजस्थान शिक्षा परिषद प्रधानाचार्य (रेसा पी) का 11वां प्रांतीय सम्मेलन व अधिवेशन भव्य रूप से आयोजित किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

सम्मेलन के मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष पंकज गुप्ता रहे। विशिष्ट अतिथियों में माध्यमिक शिक्षा निदेशक बीकानेर सीताराम जाट, रेसा पी प्रदेशाध्यक्ष बी.के. गुप्ता, रेसला पूर्व प्रदेशाध्यक्ष मोहन सिहाग, रतनगढ़ के पूर्व विधायक अभिनेष महर्षी, हनुमान सेवा समिति अध्यक्ष सत्यप्रकाश पुजारी, रेसा पी मुख्य संरक्षक प्रमोद मिश्रा, रेसा पी संरक्षक राजूराम चौधरी, प्रांतीय महामंत्री दिनेश मीणा, रेसा वीपी पूर्व प्रदेशाध्यक्ष भंवरलाल गुर्जर सहित अनेक शिक्षा व समाज से जुड़े गणमान्य लोग मंचस्थ रहे।

सम्मेलन के दौरान शिक्षा विभागीय उत्सव, जयंती एवं मंच संचालन विषयक पुस्तक का विमोचन भी किया गया। विभिन्न वक्ताओं ने शिक्षा की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर अपने विचार रखे।

रेसा पी प्रदेशाध्यक्ष बी.के. गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि गुरु का कार्य पाप, ताप और अज्ञान का नाश कर ज्ञान का प्रकाश फैलाना है। उन्होंने बताया कि वसुंधरा राजे सरकार के कार्यकाल में एक साथ पांच हजार प्रधानाचार्यों की नियुक्ति की गई थी। गुरु बच्चों को संस्कारवान और चरित्रवान बनाता है तथा शिक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखना हम सभी का मुख्य दायित्व है।

भाजपा प्रदेश कोषाध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि शिक्षा से ही शक्ति का निर्माण होता है। 21वीं सदी इंटरनेट की सदी है, ऐसे में शिक्षक का दायित्व है कि बच्चों के सर्वांगीण विकास पर गंभीरता से कार्य करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सम्मेलन के माध्यम से शिक्षकों की समस्याओं पर चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा।

रेसा पी मुख्य संरक्षक प्रमोद मिश्रा ने कहा कि राजस्थान की शिक्षा प्रणाली संस्कारों के माध्यम से बच्चों को देश-विदेश में नाम रोशन करने के लिए तैयार कर रही है। वर्ष 2026 तक राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को नए आयामों के साथ सशक्त बनाया जाएगा।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय एक ऐसा मंदिर है जहां से सुदृढ़ नागरिक निकलते हैं। शिक्षक के दिए गए ज्ञान से ही बच्चा एक जिम्मेदार नागरिक बनता है। बदलते समय के साथ शिक्षा नीति में परिवर्तन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शिक्षक सबसे पहले बच्चे की प्रतिभा को पहचानकर उसी अनुरूप उसे तैयार करता है। डीपीसी से संबंधित कार्य 31 मार्च 2026 तक पूर्ण कराने का लक्ष्य रखा गया है।

रतनगढ़ के पूर्व विधायक अभिनेष महर्षी ने कहा कि इस सम्मेलन में शिक्षकों के दायित्व और राष्ट्र निर्माण की भूमिका पर गंभीर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि सरकार को शिक्षकों को पढ़ाई के अलावा अन्य कार्यों में नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि कागजी कार्यों में उलझने से शिक्षण प्रभावित होता है। जैसे डॉक्टर भगवान का रूप होता है, वैसे ही शिक्षक राष्ट्र निर्माण का निर्माता होता है। उन्होंने समाज से शिक्षकों को सम्मान देने की अपील की।

सम्मेलन के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता सुधार, शिक्षकों की भूमिका, नई शिक्षा नीति और भविष्य की चुनौतियों पर गहन मंथन किया गया। दो दिवसीय इस आयोजन ने राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।

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