सिंगरौली जिले की सरई नगर परिषद क्षेत्र में इन दिनों तालाब सरोवर के बीचों-बीच लग रही सब्जी मंडी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने नगर परिषद प्रशासन और मुख्य कार्यपालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि तालाब क्षेत्र में अनियमित रूप से सब्जी बाजार लगने से न केवल नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि तालाब का पानी भी तेजी से दूषित हो रहा है।
तालाब में फेंका जा रहा कचरा
स्थानीय नागरिकों के अनुसार सब्जी विक्रेता मंडी के दौरान निकलने वाले सब्जियों के छिलके, पॉलिथीन और अन्य कचरे को सीधे तालाब में फेंक देते हैं। इससे पानी की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ रहा है। तालाब का पानी आसपास के लोगों और पशुओं के उपयोग में आता है, ऐसे में प्रदूषण से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं।
जिम्मेदारी किसकी?
लोगों का कहना है कि यदि नगर परिषद प्रशासन द्वारा सख्ती बरती जाती तो तालाब के बीच बाजार लगने की नौबत ही नहीं आती। सवाल उठ रहा है कि यह लापरवाही मुख्य कार्यपालिका अधिकारी की है या फिर नियमों की अनदेखी करने वाले सब्जी विक्रेताओं की?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक जलस्रोत पर इस प्रकार अतिक्रमण और कचरा फैलाना पूरी तरह गलत है और पर्यावरणीय नियमों के भी विपरीत है।
कार्रवाई की मांग
क्षेत्रवासियों ने सीएमओ से इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि या तो सब्जी मंडी को नियमानुसार किसी निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए या फिर तालाब क्षेत्र में बाजार लगाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
चेतावनी दी गई है कि यदि नगर परिषद प्रशासन द्वारा शीघ्र कदम नहीं उठाया गया तो मामले की शिकायत जिला कलेक्टर से की जाएगी।
जनस्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार तालाब में कचरा और प्लास्टिक डालने से जल प्रदूषण बढ़ता है, जिससे मच्छरों की संख्या में वृद्धि और जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
अब देखना यह है कि सरई नगर परिषद प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और क्या तालाब को प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।
मध्य प्रदेश के सिंगरौली से संवाददाता रमेश चंद्र जायसवाल की रिपोर्ट

