सिवान जिले में रहने वाली निर्मला देवी और उनके पति रमेश यादव की जिंदगी इन दिनों गहरी आर्थिक तंगी के बीच गुजर रही है। रमेश यादव मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन सीमित आमदनी के कारण घर की जिम्मेदारियां पूरी करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। परिवार की बढ़ती जरूरतों के बीच बेटियों की शादी की चिंता अब सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
निर्मला देवी और रमेश यादव के परिवार में चार बेटियां और दो बेटे हैं। इनमें से एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि तीन बेटियों के विवाह की जिम्मेदारी अभी बाकी है। माता-पिता का कहना है कि वे अपनी बेटियों की शादी सम्मानपूर्वक करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक हालात लगातार बाधा बन रहे हैं। रोजाना की कमाई से घर का खर्च ही मुश्किल से चलता है, ऐसे में शादी जैसे बड़े आयोजन की तैयारी उनके लिए लगभग असंभव हो गई है।
परिवार ने उम्मीद और आस्था के सहारे बागेश्वर धाम से सहायता की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उन्हें विश्वास है कि यदि कोई सहयोग मिल जाए तो वे अपनी बाकी बेटियों का विवाह भी सामाजिक सम्मान के साथ कर पाएंगे। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय लोग भी परिवार की स्थिति को लेकर संवेदनशीलता जता रहे हैं।
सिवान का यह परिवार आज जिस कठिन दौर से गुजर रहा है, वह देश के कई ऐसे मजदूर परिवारों की हकीकत भी बयां करता है, जो सीमित संसाधनों में बड़ी जिम्मेदारियों को निभाने की कोशिश कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस परिवार की मदद के लिए कौन आगे आता है और क्या इन बेटियों के सपनों को नया सहारा मिल पाएगा।

