ब्रेकिंग न्यूज़ | सिंगरौली
सिंगरौली जिले के सरई नगर परिषद अंतर्गत सरई बंजारी मुख्य मार्ग पर इन दिनों भारी अव्यवस्था का माहौल बना हुआ है। सड़क पर मिट्टी और गिट्टी का पहाड़ जैसा ढेर लगा होने से आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति पिछले कई दिनों से बनी हुई है, लेकिन नगर परिषद द्वारा इसे हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों लोग गुजरते हैं, जिनमें स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और कामकाजी लोग शामिल हैं। सड़क पर फैली मिट्टी और गिट्टी के कारण फिसलन और दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
जनप्रतिनिधियों के गैर-जिम्मेदाराना बयान से बढ़ा आक्रोश
मामले को लेकर जब वार्ड के पार्षद से सवाल किया गया, तो उन्होंने उल्टा पत्रकारों पर ही आरोप लगाते हुए कहा कि “पत्रकारों का जमीन बिक चुका है।” वहीं नगर परिषद के उपाध्यक्ष द्वारा यह बयान दिया गया कि “पत्रकारों को केवल मिट्टी ही दिखाई देती है।” इन बयानों ने न केवल पत्रकारों बल्कि आम जनता के बीच भी आक्रोश पैदा कर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का यह रवैया पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना है। जनता की समस्याओं को सुलझाने के बजाय इस तरह के बयान देना उनके कर्तव्यों से मुंह मोड़ने जैसा है।
जिम्मेदारी किसकी? बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि इस मार्ग पर कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या नगर परिषद के अधिकारी जिम्मेदार होंगे या वार्ड के पार्षद? फिलहाल इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है।
जनता का आरोप है कि दुर्घटना होने के बाद न तो पार्षद मौके पर पहुंचेंगे और न ही मुख्य कार्यपालन अधिकारी। ऐसे में लोगों की सुरक्षा पूरी तरह भगवान भरोसे है।
पत्रकारों पर आरोप, भ्रष्टाचार पर चुप्पी
इस मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है कि जब पत्रकार इस तरह की समस्याओं को उजागर करते हैं, तो उन पर ही आरोप लगाए जाते हैं। यदि पत्रकार अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जाती है। वहीं यदि वे चुप रहते हैं, तो स्थिति जस की तस बनी रहती है।
जनता की मांग
सरई नगर परिषद की जनता ने मांग की है कि सरई बंजारी मुख्य मार्ग पर रखी मिट्टी और गिट्टी को तत्काल हटाया जाए और सड़क को सुचारू बनाया जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
निष्कर्ष
यह पूरा मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक कार्रवाई करता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।

