दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने को लेकर आया अपडेट, जानें कब से भर सकेंगे फर्राटा?

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यह एक्सप्रेसवे उत्तर भारत में कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देगा और दिल्ली से देहरादून की यात्रा को पहले से कहीं अधिक आसान और तेज बना देगा।दिल्ली-देहरादून के बीच बन चुके एक्सप्रेसवे को लेकर लोगों का इंतजार अब और बढ़ गया है। यात्रा समय को काफी कम करने वाले 212 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। एक्सप्रेसवे का उद्घाटन अब अगले महीने तक टाल दिया गया है। खबर के मुताबिक, जो एक्सप्रेसवे पहले फरवरी 2026 में शुरू होने की उम्मीद थी, अब उसके मार्च में उद्घाटन की संभावना है। परियोजना के कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य अभी अधूरा है। बताया गया है कि मार्च के शुरुआती दिनों तक काम पूरा हो जाएगा और महीने के दूसरे सप्ताह में इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

कैसे घटेगा यात्रा समय?
6-लेन वाला यह एक्सप्रेसवे दिल्ली से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून तक की यात्रा को मौजूदा करीब 6.5 घंटे से घटाकर सिर्फ 2.5 से 3 घंटे कर देगा। कारों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों के लिए 80 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। करीब 12,000 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को चार सेक्शन में विकसित किया गया है। यह मार्ग दिल्ली में अक्षरधाम के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से शुरू होकर शास्त्री पार्क, खजूरी खास, मंडोला (खेकरा) स्थित ईपीई इंटरचेंज, बागपत, शामली और सहारनपुर होते हुए देहरादून तक जाएगा।

खबर के मुताबिक, पहले अधिकारियों ने जानकारी देते हुए कहा था कि सहारनपुर खंड के 80 किलोमीटर हिस्से का काम पूरा हो चुका है, जिसमें उत्तराखंड के जड़ौदा पांडा से दात काली मंदिर तक 12 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड शामिल है। इस एलिवेटेड हिस्से पर यातायात शुरू हो चुका है। वहीं लखनौर से गणेशपुर तक 41 किलोमीटर का हिस्सा भी चालू कर दिया गया है।

एक्सप्रेसवे की खास बातें
एक्सप्रेसवे पर दातकाली में 340 मीटर लंबी सुरंग, 16 एंट्री-एग्जिट प्वाइंट, 113 अंडरपास और पांच रेलवे ओवरब्रिज शामिल हैं। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को वर्ष 2020 में मंजूरी दी गई थी। इसके बाद दिसंबर 2021 में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इसकी आधारशिला रखी थी। शुरुआत में इसे 2024 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन निर्माण में देरी के चलते अब इसकी समयसीमा मार्च 2026 तक बढ़ गई है। इस एक्सप्रेसवे में एशिया का सबसे लंबा 12 किलोमीटर का वाइल्डलाइफ कॉरिडोर भी शामिल है। इसके एक तरफ राजाजी नेशनल पार्क स्थित है, जबकि दूसरी तरफ रिस्पना और बिंदल नदियां बहती हैं। करीब 1,200 करोड़ रुपये की लागत से बना यह एलिवेटेड कॉरिडोर नदी के बीचों-बीच 575 खंभों पर खड़ा किया गया है।

 

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