सिंगरौली जिले के सरई नगर परिषद क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और दुखद मामला सामने आया है

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सिंगरौली जिले के सरई नगर परिषद क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज और दुखद मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। जानकारी के अनुसार 7 अप्रैल 2026 को नगर परिषद वार्ड क्रमांक 5 में नाली निर्माण कार्य के दौरान राजेश मिश्रा नामक व्यक्ति की फ्लोरी मशीन में दबने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया है और स्थानीय लोग इसे केवल एक हादसा मानने को तैयार नहीं हैं।

मृतक की पहचान राजेश मिश्रा पिता अभिराज मिश्रा निवासी वार्ड क्रमांक 5 के रूप में हुई है। परिवार का आरोप है कि यह सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि एक सुनियोजित साजिश हो सकती है। मृतक की पत्नी, पिता, भाई और साले का कहना है कि नगर परिषद की गाड़ी द्वारा जानबूझकर एक्सीडेंट कराया गया है। परिवार ने दावा किया है कि कुछ दिन पहले नाली निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार को लेकर मृतक राजेश मिश्रा की ठेकेदार से तीखी बहस और वार्तालाप हुई थी। इसके मात्र दो दिन बाद यह हादसा हो जाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब स्थानीय लोगों और मृतक परिवार ने आरोप लगाया कि नगर परिषद से जुड़े कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा मामले को दबाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि पार्षद प्रेम सिंह भाटी वार्ड क्रमांक 14 और रिहाना खान पति शहजाद की ओर से 25000 रुपये लेकर पोस्टमार्टम हाउस न ले जाकर सीधे अंतिम संस्कार करने का दबाव बनाया गया। इस आरोप के सामने आने के बाद नगरवासियों का गुस्सा फूट पड़ा और बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। क्षेत्र में धरना प्रदर्शन शुरू हो गया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मौत वास्तव में दुर्घटना थी तो पोस्टमार्टम और निष्पक्ष जांच से परहेज क्यों किया जा रहा था। यही सवाल अब पूरे सरई नगर परिषद क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

इसी बीच मृतक परिवार के सहयोगी राजेश जायसवाल और नीरज भारती के खिलाफ भी थाने में एफआईआर दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि यह कार्रवाई उन्हें डराने और दबाने की कोशिश है ताकि वे मामले को आगे न बढ़ा सकें। परिवार का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई उन्हें न्याय की लड़ाई से पीछे हटाने के लिए की जा रही है।

मृतक के परिजनों ने साफ कहा है कि उन्हें किसी व्यक्ति द्वारा बहकाया नहीं गया और न ही किसी के द्वारा 25 लाख रुपये मुआवजा तथा सरकारी नौकरी दिलाने का कोई आश्वासन दिया गया था। उनका कहना है कि वे केवल निष्पक्ष जांच और न्याय चाहते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्या यह मामला महज एक हादसा है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश छिपी हुई है, यह जांच के बाद ही साफ हो सकेगा। फिलहाल पूरे सिंगरौली और सरई क्षेत्र की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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