पंचायत कार्य की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल, बरसात से पहले टूटने की आशंका
भोपाल जिले की बैरसिया तहसील अंतर्गत गांव डीलर दिल्लोड में जिला पंचायत द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। गांव में चल रहे इस निर्माण कार्य पर घटिया सामग्री के उपयोग और मानकों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाली निर्माण कार्य को टुकड़ों में कराया जा रहा है, जिससे इसकी मजबूती और टिकाऊपन पर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार नाली निर्माण में जिस सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, वह तय मानकों के अनुरूप नहीं है। सीमेंट, गिट्टी और अन्य निर्माण सामग्री में मिलावट होने का आरोप लगाया जा रहा है। ग्रामीणों और बाहर रह रहे प्रवासियों ने आशंका जताई है कि यदि इसी प्रकार घटिया सामग्री से नाली का निर्माण किया गया तो यह बरसात के शुरुआती दिनों में ही क्षतिग्रस्त हो जाएगी, जिससे गांव में जलभराव, गंदगी और बदबू जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
गांव निवासी हरीश (उम्र 28 वर्ष), पिता – देवी चरण ने बताया कि निर्माण कार्य में न तो गुणवत्ता की जांच की जा रही है और न ही एकरूपता से काम हो रहा है। नाली के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरह की सामग्री डाली जा रही है, जिससे पूरा ढांचा कमजोर बन रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा गांववासियों को लंबे समय तक भुगतना पड़ सकता है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि उन्होंने कई बार पंचायत और संबंधित विभाग के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण नहीं किया। लोगों में यह नाराजगी है कि विकास कार्यों के नाम पर यदि भ्रष्टाचार किया गया तो इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्थानीय प्रवासियों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई और मानक के अनुसार कार्य नहीं कराया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई हो तथा नाली का निर्माण दोबारा गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि हर सरकारी कार्य में जनता के पैसों का सही उपयोग होना चाहिए।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला पंचायत और संबंधित विभाग इस पूरे मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और ग्रामीणों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई करते हैं।

