यमुनानगर/दुसानी।
गांव दुसानी (तहसील जगाधरी, जिला यमुनानगर) की विधवा महिला बबली रानी ने अपने बेटे मोहित की मौत को लेकर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं, जिससे पूरा क्षेत्र स्तब्ध है। पीड़िता का कहना है कि पहले उनके पति शीशपाल की मौत हो चुकी है और अब उनके 32 वर्षीय बेटे मोहित की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। मां का आरोप है कि उनके बेटे को “धीरे-धीरे जहर” देकर मार दिया गया और इस पूरे मामले में स्थानीय दबंगों, पुलिस और ग्राम प्रधान की मिलीभगत है।
परिजनों के अनुसार, मोहित मानसिक रूप से बीमार था और खेती-बाड़ी का काम करता था। 4 फरवरी 2026 की शाम करीब सात बजे वह घर से निकला था, लेकिन रात भर वापस नहीं लौटा। परिवार ने अपने स्तर पर तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन अखबार में खबर पढ़कर पता चला कि कलानौर के पास रेलवे लाइन के किनारे एक शव बरामद हुआ है। इसके बाद परिवार जीआरपी थाना जगाधरी पहुंचा, जहां फोटो और शव देखकर उन्होंने मृतक की पहचान अपने बेटे मोहित के रूप में की। 6 फरवरी 2026 को शव की शिनाख्त के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए शव ले गया।
मां बबली रानी का आरोप है कि उनके बेटे की मौत हादसा नहीं बल्कि साजिश है। उन्होंने दावा किया कि “काला राणा गैंग” से जुड़े लोगों—नथूराम, विजय कुमार, राजकुमार, अजय कुमार, ओमप्रकाश व अन्य—ने उनके परिवार को वर्षों से परेशान किया, जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की और मानसिक प्रताड़ना दी। पीड़िता का कहना है कि फर्जी दस्तावेज बनवाकर जमीन हड़पने की साजिश रची गई और परिवार को लगातार डराया-धमकाया गया।
बबली रानी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके बेटे को धीरे-धीरे जहर दिया गया, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ती गई और अंततः उसकी मौत हो गई। उनका कहना है कि पुलिस ने भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया और ग्राम प्रधान ने भी उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। पीड़िता का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के कारण सच दबाया जा रहा है।
परिवार का कहना है कि जब उन्होंने मदद मांगी तो उन्हें बार-बार टाल दिया गया। बबली रानी ने कहा कि अगर निष्पक्ष जांच होती तो उनके बेटे की जान बच सकती थी। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और न्याय की मांग की है।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों ने भी मांग की है कि रेलवे पुलिस, स्थानीय थाना और ग्राम पंचायत की भूमिका की जांच हो, मोबाइल रिकॉर्ड खंगाले जाएं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की पुनः समीक्षा की जाए।
पीड़िता ने जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए दोषियों को सजा दिलाई जाए ताकि किसी और मां को यह दर्द न सहना पड़े।

