सिंगरौली जिले में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक गरीब उपभोक्ता को विभागीय कर्मचारियों की मनमानी और दबाव का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, संबंधित उपभोक्ता ने “समाधान योजना” के तहत अपने बिजली बिल की बकाया राशि को मासिक किस्तों में नियमित रूप से जमा किया है। इसके बावजूद विभाग द्वारा अचानक 27 हजार रुपये का अतिरिक्त बिल जोड़ दिया गया, जिससे उपभोक्ता की परेशानी बढ़ गई है।
पीड़ित उपभोक्ता का आरोप है कि जब उसने इस अतिरिक्त बिल के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो बिजली विभाग के कर्मचारियों ने न केवल स्पष्ट जवाब देने से बचा, बल्कि उसे धमकी भी दी। आरोप है कि कर्मचारियों ने कहा कि यदि राशि का भुगतान नहीं किया गया तो उसकी गाड़ी और घर का सामान जब्त कर लिया जाएगा। इस तरह की धमकियों से उपभोक्ता और उसका परिवार मानसिक रूप से परेशान है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि क्षेत्र में इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं, जहां गरीब उपभोक्ताओं को नियमों का हवाला देकर दबाव में लिया जाता है। समाधान योजना का उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत देना है, लेकिन अगर उसी योजना के तहत भुगतान करने के बाद भी अतिरिक्त बिल थोपे जा रहे हैं, तो यह योजना की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
पीड़ित उपभोक्ता ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, गलत तरीके से जोड़ा गया बिल तत्काल प्रभाव से हटाया जाए, ताकि उसे राहत मिल सके।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और गरीब उपभोक्ता को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

