सिंगरौली। सरई नगर परिषद एक बार फिर चर्चा में है। नगर परिषद में कथित वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोपों को लेकर मामला गरमा गया है। समाजसेवी राजेश कुमार जायसवाल द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है।
राजेश जायसवाल ने दिनांक 05 जनवरी 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत आवेदन प्रस्तुत किया था। उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी—
1. नगर परिषद के टेंडर एवं विकास कार्यों से संबंधित विस्तृत जानकारी।
2. परिषद के वाहनों, डीजल खर्च एवं लॉगबुक का विवरण।
3. परिषद में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन एवं ईपीएफ (EPF) कटौती का रिकॉर्ड।
नगर परिषद की ओर से विभिन्न पत्रों के माध्यम से जवाब दिया गया कि कुछ जानकारी तीन पृष्ठों की है, जिसकी छायाप्रति हेतु ₹2 प्रति पृष्ठ के मान से ₹6 जमा करने होंगे। साथ ही विस्तृत जानकारी के लिए पृथक-पृथक आवेदन प्रस्तुत करने की बात कही गई। ई-टेंडर संबंधी जानकारी मध्यप्रदेश ई-नगर पालिका पोर्टल पर उपलब्ध होने का उल्लेख भी किया गया।
आवेदक का आरोप है कि जब वे निर्धारित शुल्क जमा करने पहुंचे तो उन्हें सीधे जानकारी देने के बजाय ऑनलाइन पोर्टल का हवाला देकर टाल दिया गया। उनका कहना है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा सोमवार को सूचना देने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
राजेश जायसवाल का आरोप है कि नगर परिषद में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है तथा कुछ कर्मचारी पार्षदों के घरों में कार्य कर रहे हैं जबकि वेतन परिषद से लिया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो सूचना देने में देरी क्यों हो रही है।
वहीं परिषद का कहना है कि जानकारी तैयार की जा रही है और नियमानुसार शुल्क प्राप्त होने के बाद उपलब्ध कराई जाएगी। कुछ जानकारियां ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध बताई गई हैं।
यदि निर्धारित समय सीमा में सूचना प्रदान नहीं की जाती है तो आवेदक प्रथम अपील अथवा राज्य सूचना आयोग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
रिपोर्ट: सिंगरौली से संवाददाता रमेश चंद्र जायसवाल

