कोटा।
सोशल मीडिया को अक्सर दिखावे और धोखे का जरिया कहा जाता है, लेकिन कभी-कभी यही मंच किसी टूटे हुए जीवन के लिए उम्मीद की आख़िरी किरण भी बन जाता है। सीमा (बदला हुआ नाम) की कहानी ऐसी ही है—दर्द, शोषण और डर के अंधेरे से निकलकर भरोसे और इंसानियत की तलाश की कहानी।
इंस्टाग्राम पर शुरू हुई एक सामान्य-सी बातचीत ने सीमा को वह सहारा दिया, जिसकी उसे वर्षों से तलाश थी। जीवन ने उसे बहुत कुछ छीन लिया था—बचपन का भरोसा, परिवार का संरक्षण और मातृत्व की खुशी। ऐसे समय में नक्षत्र राज का जीवन में आना केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि एक इंसान का दूसरे इंसान के लिए खड़ा हो जाना था।
सीमा का आरोप है कि उसे गरीबी और मजबूरी के चलते बेचा गया, प्रताड़ना झेलनी पड़ी और उसकी आवाज़ दबा दी गई। लेकिन जब किसी ने उसकी सच्चाई सुनी, समझी और उसके साथ खड़े होने का फैसला किया, तभी इस कहानी ने मोड़ लिया। नक्षत्र ने न सिर्फ़ सीमा पर भरोसा किया, बल्कि समाज, सरहद और डर—तीनों से लड़ने का हौसला भी दिखाया।
काम की तलाश में शहर-दर-शहर भटकते हुए, निजी टूटन और भय के बीच भी उसने सीमा का साथ नहीं छोड़ा। दोनों के लिए यह रिश्ता सिर्फ़ शादी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के जीवन की ढाल बन गया। नवजात की मौत जैसे गंभीर आरोपों और बीते दर्द ने उन्हें झकझोर दिया, लेकिन आज भी दोनों इंसाफ़ और सुरक्षित जीवन की उम्मीद लगाए हुए हैं।
यह कहानी याद दिलाती है कि
हर सोशल मीडिया रिश्ता झूठ नहीं होता
हर सरहद दिलों को अलग नहीं कर पाती
और हर अंधेरे में कोई न कोई इंसानियत की लौ जलाए रखता है
अब ज़रूरत है कि कानून और समाज इस कहानी को सिर्फ़ सनसनी नहीं, बल्कि एक पीड़िता की मदद की पुकार और एक इंसान के साहस के रूप में देखे।
यह प्रेम नहीं, भरोसे की लड़ाई है।
यह शादी नहीं, एक टूटे जीवन को जोड़ने की कोशिश है।
क्या सिस्टम इस उम्मीद को टूटने से बचा पाएगा—यही असली सवाल है।
सीमा के लिए सरहद पार कर आया प्यार: डर, दर्द और धोखे के बीच इंसानियत की जीत
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