प्रदेश की राजनीति के केंद्र लखनऊ विधानसभा में आज बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा एक अहम मुद्दा गूंजा। चरथावल से पंकज मलिक ने सदन में दीर्घकालिक कुपोषण (Chronic Malnutrition) का गंभीर विषय मजबूती से उठाते हुए सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।
“कुपोषण केवल स्वास्थ्य नहीं, भविष्य का प्रश्न”
सदन में बोलते हुए पंकज मलिक ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों, विशेषकर मुजफ्फरनगर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आज भी बच्चों को संतुलित और पर्याप्त पोषण नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि लंबे समय तक पोषण की कमी बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर सीधा असर डालती है, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि कुपोषण सिर्फ स्वास्थ्य विभाग का विषय नहीं, बल्कि समाज और सरकार दोनों की साझा जिम्मेदारी है। “यदि बच्चे स्वस्थ और पोषित नहीं होंगे, तो मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र की परिकल्पना अधूरी रह जाएगी,” उन्होंने सदन में कहा।
सरकार से की ठोस कार्ययोजना की मांग
सपा विधायक ने सरकार से मांग की कि आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यप्रणाली को और मजबूत किया जाए, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए पोषण आहार की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए तथा ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान तेज किए जाएं।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच और पोषण स्तर की निगरानी की जाए, ताकि शुरुआती स्तर पर ही समस्या की पहचान कर समाधान किया जा सके।
सामाजिक जागरूकता की भी जरूरत
पंकज मलिक ने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव में परिवार संतुलित आहार के महत्व को नहीं समझ पाते। ऐसे में पोषण शिक्षा और जनजागरूकता अभियान बेहद जरूरी हैं।
सदन में उठे इस मुद्दे के बाद माना जा रहा है कि सरकार को अब प्रदेश में कुपोषण की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी पड़ सकती है और आगामी बजट में इस दिशा में अतिरिक्त प्रावधान भी किए जा सकते हैं।
बच्चों का पोषण केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले कल की मजबूती की बुनियाद है—इसी संदेश के साथ यह मुद्दा विधानसभा में प्रमुखता से उठा।

