सरई नगर परिषद में सड़क निर्माण को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। एक कथित ऑडियो सामने आने के बाद नगर परिषद के सीएमओ पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऑडियो में सीएमओ यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि सड़क पहले से ही मजबूत है, इसलिए 6 इंच की बजाय केवल 3 इंच की ढलाई (कोट) की जा रही है। और 110 मी बाद रोड का निर्माण बंद कर दिया गया
इस बयान के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक समूहों में आक्रोश बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क पहले से ही मजबूत थी, तो फिर नए सिरे से टेंडर जारी करने और लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ी। यह सवाल अब पूरे मामले का केंद्र बन गया है।
तकनीकी दृष्टि से देखा जाए तो किसी भी सड़क निर्माण का कार्य DPR (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के आधार पर होता है, जिसमें मोटाई, गुणवत्ता और सामग्री का स्पष्ट उल्लेख होता है। आमतौर पर यदि DPR में 6 इंच मोटाई स्वीकृत होती है और मौके पर केवल 3 इंच की परत डाली जाती है, तो यह सीधे तौर पर नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आ सकता है। ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि शेष 3 इंच के बजट का क्या होगा। क्या वह राशि सरकारी खजाने में वापस जाएगी या कहीं और इस्तेमाल होगी, यह स्पष्ट नहीं है।
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि मजबूत सड़क पर केवल पतली परत बिछाना ‘रिन्यूअल कोट’ के नाम पर एक पुरानी प्रक्रिया है, जिसका उपयोग कई बार गुणवत्ता से समझौता करते हुए बजट खर्च दिखाने के लिए किया जाता रहा है। इससे सड़क की उम्र और मजबूती दोनों पर असर पड़ सकता है।
मामले में एक और पहलू यह भी सामने आ रहा है कि क्षेत्र के पार्षद द्वारा एम्बुलेंस जैसी सुविधाओं को दिखाकर जनता के बीच सकारात्मक छवि बनाने की कोशिश की जा रही है, जबकि दूसरी ओर विकास कार्यों में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
अब वार्ड 14 के नागरिक इस पूरे मामले में स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सड़क वास्तव में मजबूत है, तो अनावश्यक खर्च को रोका जाए और बजट वापस किया जाए। वहीं यदि नया बजट स्वीकृत हुआ है, तो काम भी उसी मानक के अनुसार पूरा होना चाहिए।
फिलहाल यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

