सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार, यदि कोई अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति ईसाई धर्म में परिवर्तित हो जाता है, तो उस व्यक्ति को ‘SC’ के रूप में प्राप्त सभी संवैधानिक लाभ और कानूनी सुरक्षा तुरंत समाप्त हो जाएंगी।
भारतीय संविधान के 1950 के आदेश के अनुसार, अनुसूचित जाति का दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायियों को ही प्राप्त है। चूंकि ईसाई धर्म में आधिकारिक तौर पर कोई ‘जाति व्यवस्था’ नहीं है, इसलिए धर्मांतरण के बाद संबंधित व्यक्ति को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करने या आरक्षण के लाभ उठाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
ईखबर मीडिया के लिए विलास दलु पवार कि रिपोट

