उन्नाव जिले के बारासगवर थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। गांव मनीखेड़ा की रहने वाली तारादेवी पत्नी कमलेश ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को पहले उचगांव चौराहे पर बेरहमी से पीटा गया और अगले ही दिन जब वह उसे देखने अस्पताल जा रही थीं, तब उचगांव चौकी के सामने उन्हें घेरकर मारपीट और लूटपाट की गई। पीड़ित परिवार का कहना है कि लगातार शिकायत के बावजूद पुलिस कोई सुनवाई नहीं कर रही है।
पीड़िता के अनुसार, 12 फरवरी 2026 की शाम उनका पुत्र विश्वजीत सिंह उचगांव चौराहे पर सामान लेने गया था। आरोप है कि वहीं गांव के अखिलेश और विनेश ने उसे रोककर लाठी-डंडों से जमकर पीटा। हमले में विश्वजीत के सिर और पैर में गंभीर चोटें आईं और पैर में फ्रैक्चर हो गया। घायल युवक को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घटना के अगले दिन 13 फरवरी की शाम करीब छह बजे तारादेवी अपने बेटे को देखने अस्पताल जा रही थीं। आरोप है कि गांव के बाहर नहर के पास, उचगांव चौकी के सामने ही रज्जन पुत्र विंदा, अखिलेश व विनेश पुत्रगण रज्जन, तथा सतीश और मनीष पुत्रगण नैपाल ने उन्हें घेर लिया। सभी ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट की और धमकाते हुए उनका पर्स छीन लिया। पर्स में 20 हजार रुपये नकद और सोने की जंजीर रखी थी।
शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो आरोपी वहां से भाग निकले। पीड़िता का कहना है कि वह उसी रात थाना बारासगवर पहुंचीं, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अगले दिन और उसके बाद भी कई बार थाने के चक्कर लगाने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हुई और आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस की उदासीनता से दबंगों के हौसले बुलंद हैं। परिवार ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि समय रहते आरोपियों की गिरफ्तारी कर निष्पक्ष जांच की जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और क्षेत्र में कानून का भय कायम हो।
घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है। पुलिस चौकी के सामने मारपीट और लूट की वारदात के बाद भी कार्रवाई न होना आमजन की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। अब निगाहें प्रशासनिक हस्तक्षेप पर टिकी हैं।

