बिहार के समस्तीपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के कमाल गांव की रहने वाली 22 वर्षीय चांदनी कुमारी की जिंदगी पिछले चार वर्षों में किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। चार साल पहले उनकी शादी साजन कुमार से हुई थी। शादी के बाद चांदनी ससुराल में रह रही थीं। करीब आठ महीने पहले साजन उन्हें अपने साथ बेंगलुरु ले गए, जहां वह काम करते थे—और यहीं से उनके वैवाहिक जीवन में उथल-पुथल शुरू हो गई।
बेंगलुरु में बदली जिंदगी
चांदनी का आरोप है कि बेंगलुरु पहुंचने के बाद साजन कुमार का संबंध समस्तीपुर की ही रहने वाली नेहा कुमारी नामक महिला से हो गया। बताया जाता है कि नेहा की शादी पहले से हो चुकी है और उसके तीन बच्चे भी हैं, लेकिन वह अपने पति को छोड़कर दिल्ली में रह रही थी। इसी दौरान साजन और नेहा के बीच नजदीकियां बढ़ीं।
चांदनी का कहना है कि इस संबंध के कारण साजन अक्सर उनके साथ मारपीट करते थे और कई-कई दिनों तक उन्हें अकेला छोड़ देते थे। उस समय चांदनी गर्भवती थीं और मानसिक व शारीरिक रूप से बेहद कमजोर महसूस कर रही थीं।
रुस्तम अली की एंट्री और नया विवाद
अकेलेपन और प्रताड़ना के बीच बेंगलुरु में ही चांदनी की पहचान असम के रहने वाले रुस्तम अली से हुई, जो वहीं काम करता था। चांदनी के अनुसार, रुस्तम ने उन्हें सहारा दिया और साथ रखने की बात कही। हालांकि यह सब तब हुआ जब वह गर्भवती थीं।
डिलीवरी के लिए चांदनी को गांव भेज दिया गया। गांव पहुंचते ही ससुराल वालों को रुस्तम अली के बारे में जानकारी मिल गई। इसके बाद, उनके मुताबिक, उन पर अत्याचार और बढ़ गया। मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगे। स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद वह वहां से निकल सकीं।
गुजरात से हैदराबाद तक
इसके बाद चांदनी गुजरात चली गईं, लेकिन साजन वहां भी पहुंच गए। उन्होंने साथ चलने का दबाव बनाया और कहा कि बेंगलुरु चलो, वहां तलाक देकर आजाद कर देंगे। भरोसा कर चांदनी उनके साथ फिर बेंगलुरु चली गईं, लेकिन वहां पहुंचते ही दोबारा मारपीट शुरू हो गई।
चांदनी का आरोप है कि साजन ने ढाई महीने के मासूम बच्चे को उनसे छीन लिया और उन्हें घर में बंद कर दिया। किसी तरह जान बचाकर वह वहां से भाग निकलीं और फिलहाल हैदराबाद में रह रही हैं।
मां का साथ भी नहीं
इस पूरे मामले में एक और भावनात्मक मोड़ तब आया जब चांदनी ने बताया कि उनकी मां ने उनका साथ देने से इनकार कर दिया। चांदनी के अनुसार, उनकी मां ने कहा—
“अगर लड़का हिंदू होता तो हम सपोर्ट करते। लड़का मुस्लिम है, इसलिए हम सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। बाकी तुम्हारी जिंदगी है, तुम समझो—हम तुम्हारा साथ नहीं दे पाएंगे।”
चांदनी का कहना है कि उनका पूरा ससुराल पक्ष भी उनके पति साजन कुमार का ही साथ दे रहा है। ऐसे में वह खुद को पूरी तरह अकेला महसूस कर रही हैं।
बच्चे की कस्टडी पर संग्राम
चांदनी का आरोप है कि साजन कुमार उनका बच्चा वापस नहीं दे रहे हैं। दूसरी ओर, रुस्तम अली आज भी उन्हें अपने साथ रखने को तैयार है, लेकिन चांदनी अपने बच्चे को छोड़कर नई जिंदगी शुरू नहीं करना चाहतीं।
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—
पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास की कमी
विवाहेतर संबंधों का जाल
घरेलू हिंसा की भयावहता
धर्म के आधार पर पारिवारिक समर्थन का बंटवारा
और एक मासूम की जिंदगी पर मंडराता संकट
न्याय की आस
फिलहाल चांदनी अपने बच्चे की वापसी और सुरक्षित जीवन की मांग कर रही हैं। अब देखना यह है कि उन्हें न्याय कब और कैसे मिलता है।

