गऊघाट सोन नदी पर पुल न बनने से बढ़ा खतरा: दो अक्टूबर की घटना के बाद भी प्रशासन मौन, ग्रामीणों की मांग — अतिशीघ्र मंजूरी दी जाए

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शहडोल/उमरिया। मध्यप्रदेश के शहडोल और उमरिया जिले की सीमा पर स्थित गऊघाट सोन नदी पर वर्षों से लंबित पुल निर्माण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। ग्राम पंचायत अंकुरी (जिला शहडोल) और उमरिया जिला, ग्राम पंचायत बड़ादार, ग्राम पैली  के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लगातार ज्ञापन और पत्राचार के बावजूद अब तक पुल निर्माण को स्वीकृति नहीं मिली है। इससे हजारों ग्रामीणों, खासकर छात्र-छात्राओं को रोजाना जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है।

ग्रामीणों के अनुसार, गऊघाट पर पुल न होने के कारण बरसात के दिनों में हालात और भी भयावह हो जाते हैं। नदी का जलस्तर बढ़ते ही दोनों ओर के गांवों का संपर्क लगभग कट जाता है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ती है। 2 अक्टूबर 2025 को दुर्गा विसर्जन के दौरान एक गंभीर घटना घट चुकी है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।

ग्राम पंचायत अंकुरी की सरपंच श्रीमती गीतादेवी सिंह और ग्राम पंचायत बरदढ़ार के सरपंच श्री पुरुषोत्तम सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने बताया कि मुख्यमंत्री, लोक निर्माण विभाग, वन विभाग और राष्ट्रपति कार्यालय तक रजिस्ट्री पत्र और ज्ञापन भेजे जा चुके हैं। कई बार सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे अधूरा छोड़ दिया गया और निर्माण कार्य आज तक प्रारंभ नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि गुरु घाट सोन नदी पर पुल बनने के लिए अतिशीघ्र मंजूरी दी जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। उनका कहना है कि पुल निर्माण केवल विकास का विषय नहीं, बल्कि जनसुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुल बन जाने से न केवल शहडोल और उमरिया जिले के कई गांवों को सीधा संपर्क मार्ग मिलेगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। वर्तमान में लोगों को 2 से 3 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है।

क्षेत्र के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही गऊघाट सोन नदी पुल निर्माण को स्वीकृति देकर कार्य प्रारंभ नहीं कराया गया तो वे जनआंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनका कहना है कि बार-बार हादसों के बाद भी यदि प्रशासन नहीं जागा, तो किसी बड़े अनहोनी की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

अब पूरा क्षेत्र एक ही सवाल पूछ रहा है — आखिर गुरु घाट सोन नदी पुल निर्माण को अतिशीघ्र मंजूरी कब मिलेगी?

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