7 साल बाद पाकिस्तान से लौटा युवक, किसी से नहीं कर रहा ज्यादा बात, स्वागत कर रहे विधायक

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प्रसन्नजीत चार दिन पहले ही पाकिस्तानी जेल से रिहा हो गया था। इसके बाद से वह अमृतसर में था। अब वह गांव आ चुका है। हालांकि, वह किसी से भी ज्यादा बातचीत नहीं कर रहा है।बालाघाट के रहने वाले प्रसन्नजीत पाकिस्तानी जेल से रिहा होकर 7 साल बाद अपने घर लौटे हैं। हालांकि, वह किसी से ज्यादा बातचीत नहीं कर रहे, लेकिन उनके लौटने से परिजन बेहद खुश हैं। खासकर उनकी बहन को ज्यादा खुशी है, जिन्होंने अपने भाई की वापसी के लिए लगातार संघर्ष किया। पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर प्रसन्नजीत रंगारी शुक्रवार शाम अपने गांव खैरलांजी पहुंचे। जिला प्रशासन की ओर से प्रसन्नजीत को अमृतसर से लाने की व्यवस्था बनायी गई थी।
प्रसन्नजीत को लाने के लिए एक चार पहिया वाहन में उसके जीजा के साथ एक सचिव, रोजगार सहायक, पुलिस व राजस्व का 1-1 अमला को अमृतसर भेजा गया था। जो 5 फरवरी को ही बालाघाट आने के लिये निकल गए थे। 7 साल बाद प्रसन्नजीत अपने घर लौट आया है। कटंगी पहुंचने पर विधायक गौरव पारधी, एसडीएम तहसीलदार सहित स्थानीय लोगों ने स्वागत किया। घर महकेपार आने पर बहन सहित परिवार और ग्रामीणों ने स्वागत किया।31 जनवरी को हुई थी रिहाई
31 जनवरी 2026 को पाकिस्तान से 7 भारतीय कैदियों की रिहाई हुई थी। इनमें प्रसन्नजीत रंगारी भी शामिल हैं, जो 7 साल से पाकिस्तान की जेल में सुनील अदे के नाम से बंद था। बी-फार्मेसी करने वाला प्रसन्नजीत रंगारी अचानक ही मानसिक बीमार हो गया। इसी के कारण वह साल 2017-18 को घर से अचानक लापता हुआ था। जहां से बिहार चले जाने के बाद वह वापस घर लौट आया था। लेकिन उसके बाद 2019 में फिर उसके लापता होने के बाद उसकी कोई खबर नहीं मिली थी। जिसे परिजनों ने तलाश करने के बाद नहीं मिलने पर मरा हुआ मान लिया था। 2021 में पाकिस्तान चला गया था प्रसन्नजीत
दिसंबर 2021 में एक फोन आया और पता चला कि प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बंद है। परिजनों को पता चला था कि 1 अक्टूबर 2019 में प्रसन्नजीत को पाकिस्तान के बाटापुर से हिरासत में लिया गया। जहां वह, सुनिल अदे के नाम से बंद है। 2021 से, प्रसन्नजीत के पाकिस्तान जेल में बंद होने की जानकारी के बाद उसकी बहन संघमित्रा अपने भाई के वतन वापसी के लिए लगातार संघर्ष में जुटी थी। जिसके संघर्ष के चलते वह आखिरकर अब रिहा हो गया। प्रसन्नजीत ने परिजनों को पहचाना
कलेक्टर मृणाल मीना ने प्रसन्नजीत को अमृतसर से लाने के लिये व्यवस्था बनाई। एक दल उसे लेने भेजा गया। जेल से रिहाई का मसला होने के चलते यहां से सचिव, जीआरएस, पुलिस व राजस्व के अमला के साथ प्रसन्नजीत के जीजा गया हुआ था। जो कि 5 फरवरी को निकले और 6 फरवरी की देर शाम अपने घर पहुंचा। प्रसन्नजीत वैसे किसी से अभी ज्यादा बात नहीं कर रहा है। परिवार को उसने पहचान लिया है। विधायक गौरव पारधी ने पाकिस्तान की जेल से रिहाई के लिए प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री का आभार व्यक्त किया है।

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