जहां शासकीय प्राथमिक पाठशाला बभनी में पढ़ने वाले मासूम बच्चों को पीने के लिए सुरक्षित पानी तक उपलब्ध नहीं है। मामला देवसर ब्लॉक के ग्राम पंचायत पर सोहर अंतर्गत संकुल केंद्र सरौंधा का बताया जा रहा है, जहां बच्चे मजबूरी में नदी से पानी लाकर पीने को विवश हैं।
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के देवसर क्षेत्र स्थित शासकीय प्राथमिक पाठशाला बभनी में लंबे समय से पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल में न तो हैंडपंप सही हालत में है और न ही पानी की कोई स्थायी सुविधा उपलब्ध कराई गई है। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चे पास की नदी से पानी भरकर लाते हैं और वही पानी पीते हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि कई बार इस समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों और शिक्षा विभाग को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और चिंताजनक हो गई है। बच्चों को पढ़ाई के साथ पानी की व्यवस्था के लिए भी जूझना पड़ रहा है, जो सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, शिक्षा मंत्री तथा जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें लापरवाही बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
इस पूरे मामले ने क्षेत्र में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कितनी जल्दी संज्ञान लेते हैं और बच्चों को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराते हैं।

