प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि योजना की सूची में अपात्र व्यक्तियों के नाम जोड़कर उन्हें आवास का लाभ दिया गया, जबकि वास्तविक पात्र गरीबों को योजना से वंचित कर दिया गया। इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना की आधिकारिक सूची में कई ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जो योजना की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते। आरोप है कि कुछ लाभार्थियों के पास पहले से ही पक्के मकान मौजूद हैं, इसके बावजूद उन्हें आवास आवंटित कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर, कई गरीब परिवार, जिनके पास रहने के लिए कच्चे और जर्जर मकान हैं, उन्हें सूची से बाहर कर दिया गया।
मामले को और गंभीर बनाते हुए यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लाभार्थियों के दस्तावेजों में पिता का नाम तक बदल दिया गया, ताकि उन्हें पात्र दिखाकर योजना का लाभ दिलाया जा सके। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की हेराफेरी से आम जनता को गुमराह किया जा रहा है और योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वार्ड पार्षदों और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अपने चहेते और खास व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के लिए सूची में हेरफेर किया गया है। इससे गरीब और वास्तविक जरूरतमंद लोग योजना के लाभ से वंचित रह गए हैं।
इस संबंध में नागरिकों ने मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिला कलेक्टर गौरव बनर्जी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही, दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।
नागरिकों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब और बेघर लोगों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि योजना में इस तरह की अनियमितताएं होती रहीं, तो इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाएगा। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं।

