विराट कोहली ने शतक ठोंककर एक साथ कितने सवालों के जवाब दे दिए

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राँची की सुनहरी शाम में विराट कोहली सिर्फ़ रन नहीं बना रहे थे, वो मानो वक़्त को पीछे धकेल रहे थे. दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ खेली गई 135 रन की यह पारी तकनीक का प्रदर्शन भर नहीं, बल्कि एक विराट कथानक थी.

हर शॉट, हर स्ट्राइड, हर रन उनके करियर के उन अनुभवों और संघर्ष की कहानी कह रहा था, जिन्होंने उन्हें दुनिया के सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली बल्लेबाज़ों में से एक बनाया.

राँची में शतकीय पारी के साथ ही वो मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर से आगे निकल गए हैं.

विराट कोहली अब एक ही फ़ॉर्मेट में सबसे ज़्यादा शतक लगाने वाले खिलाड़ी बन गए हैं. इससे पहले वह सचिन तेंदुलकर के साथ बराबरी पर थे. सचिन के नाम टेस्ट क्रिकेट में 51 शतक हैं.

अनसुलझा सवाल: ‘किंग, तुमने टेस्ट क्रिकेट क्यों छोड़ा?’
यह सवाल हर क्रिकेट प्रेमी के दिल में आज भी गूँजता है. वही विराट, जिन्हें इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के दिग्गज पूर्व क्रिकेटर “टेस्ट क्रिकेट का ब्रांड एंबेसडर” कहते थे, अब लाल गेंद से दूर है.

और राँची की यह पारी उस सवाल को फिर ज़िंदा कर गई, क्या उनके टेस्ट करियर का अंत स्वाभाविक था या मजबूरन बनाया गया? और क्या उनकी वापसी संभव है?

विराट की इस पारी में उनका फ़ुटवर्क तेज़, निर्णायक और लगभग संगीत जैसा था. कवर ड्राइव में पुरानी चमक, ऑन-ड्राइवमें वही चिर-परिचित आक्रामकता और रक्षात्मक शॉट्स में “दीवार जैसी शांति” दिखाई दी.

यह वह विराट थे जिन्हें देखकर हर गेंदबाज़ हक्का-बक्का रह जाता है.

कामयाबी का राज़ है प्रतिबद्धता

विराट कोहली की सफलता का राज़ उनकी कड़ी मेहनत और कभी भी खुद से संतुष्ट न होने की उनकी आदत है.

17 साल में 123 टेस्ट, 306 वन वनडे और 125 टी-20 खेलने और 27,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय रन बनाने के बावजूद, उनकी प्रतिबद्धता उन्हें महान बनाती है.

दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ मैच से पहले रांची जल्दी पहुँच गए.

मैच के बाद विराट कोहली ने कहा, “मैं इसलिए जल्दी आया था ताकि मैं हालात को अच्छी तरह समझ सकूँ- दिन में दो बार और शाम को एक बार बल्लेबाज़ी कर लूँ, ताकि मेरी तैयारी पूरी हो जाए. मैच से एक दिन पहले मैंने आराम किया, क्योंकि अब मैं 37 साल का हूँ और रिकवरी का ध्यान रखना भी ज़रूरी है.”

आलोचकों को जवाब

क्लासिक कवर ड्राइव: 11वें ओवर में कॉर्बिन बॉश की बैक-ऑफ़-ए-लेंथ गेंद ऑफ़-स्टंप के बाहर गिरी. विराट ने बिना किसी ज़ोर के, बस स्ट्राइड बढ़ाकर, सिर स्थिर रखते हुए कवर ड्राइव खेली. गेंद इतनी सफ़ाई से निकली कि कवर में खड़े फ़ील्डर केवल दर्शक बनकर रह गए.

रक्षात्मक शांति: जब प्रेनेलन सुब्रेयन स्पिन के साथ दबाव बना रहे थे, तब भी विराट के रक्षात्मक शॉट्स में शांति थी. उनका बल्ला गेंद के बिल्कुल नीचे आता और गेंद धीरे-धीरे उनके पैरों के पास गिरती. यह दर्शाता था कि वह गेंद को देर तक देख रहे थे, हड़बड़ी नहीं कर रहे थे, और दिखाया कि उनकी नींव कितनी मज़बूत थी.

52वाँ शतक: मार्को जैनसेन की गेंद पर चौका जड़कर कोहली ने अपने वनडे इंटरनेशनल करियर का 52वाँ शतक पूरा किया. यह शतक उन्होंने बैक-ऑफ़-ए-लेंथ गेंद को बैकवर्ड पॉइंट के बाईं ओर स्लाइस करके हासिल किया, जो उनकी शानदार टाइमिंग का प्रमाण था.

यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर में फ़रवरी 2025 के बाद पहला और इसी मैदान पर उनका तीसरा शतक था. शतक पूरा होते ही उन्होंने अपना हेलमेट उतारा, ख़ुशी में हवा में मुक्का मारा और दर्शकों के प्यार का अभिवादन किया.

शतक पूरा करने के बाद उन्होंने सुब्रेयन के ओवर की अंतिम तीन गेंदों पर 6, 6, 4 जड़कर यह साबित किया कि उनका आक्रामक टेंपो धीमी पिच पर भी बरकरार रहा. 11 चौकों और 7 छक्कों से सजी यह पारी बताती है कि आज उनके शॉट-निर्णय, शॉट-रेंज और मानसिक संतुलन सब चरम पर था.

रांची की पिच पर उनकी बल्लेबाज़ी एक बेहतरीन मास्टरक्लास साबित हुई. 37 साल की उम्र में भी वे ऐसे खेले मानो अब भी 25 के हों- फिट और फुर्तीले.
वह मैच को खेलने से पहले ही दिमाग में कई बार खेल लेते हैं.

कोहली का कहना है , “मैं कभी भी बहुत ज़्यादा तैयारी करने में विश्वास नहीं रखता. मेरा पूरा क्रिकेट हमेशा मानसिक रहा है. मैं शारीरिक रूप से कड़ी मेहनत करता हूँ और जब तक मेरी फ़िटनेस का स्तर ऊँचा रहता है, मैं बल्लेबाज़ी के बारे में स्पष्ट रूप से सोच सकता हूँ और अच्छा महसूस करता हूँ.”

विराट कोहली का कहना है, “मैं खेल को लेकर बहुत कल्पनाशील रहता हूँ. जब मैं खेल के बारे में सोचते हुए अपने आपको तीव्र, एकाग्र और धारदार महसूस करता हूँ, तो मुझे पता होता है कि अब मैं मैदान पर जाकर अपने खेल को पूरी सहजता के साथ निभा सकता हूँ.

उनका विकेट एक बैक-ऑफ़-ए-लेंथ गेंद पर गिरा, जो पाँचवीं स्टंप लाइन पर पड़ी थी.

कोहली शुरुआत में ही तेज़ी से आगे बढ़े और गेंद को एक्स्ट्रा कवर के ऊपर फ्लैट-बैट करने की कोशिश की. लेकिन हल्का बाहरी किनारा लगने से गेंद ऊँची उछल गई.

कवर से रिकल्टन ने कमाल का एथलेटिसिज़्म दिखाते हुए तिरछी दिशा में लंबी दौड़ लगाई और फुल-लेंथ डाइव मारते हुए स्लाइडिंग कैच लपका. गेंद क़रीब 115 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ़्तार से आई थी, लेकिन उनका कैच बिल्कुल नियंत्रित था.

रिप्ले
में मार्करम भी नज़र आए, जो करीब जाकर कोहली को लो-फाइव देकर उनकी शानदार पारी का सम्मान कर रहे थे.

क्यों यह पारी ‘अर्थपूर्ण’ है?
राँची में विराट कोहली ने जो पारी खेली, वह उनके करियर के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर एक ज़ोरदार घोषणा थी.

मूक दबाव: पिछले नौ महीनों से विराट अपने 52वें शतक का इंतज़ार कर रहे थे. यह केवल समय की लंबी प्रतीक्षा नहीं थी, बल्कि एक मूक राष्ट्रीय दबाव भी था. हर इनिंग एक राष्ट्रव्यापी बहस बन जाती थी: “क्या विराट 2027 वर्ल्ड कप तक खेल पाएँगे?”

तीखी वापसी: कुछ हफ़्ते पहले ऑस्ट्रेलिया में उन्हें लगातार दो ‘शून्य’ (डक्स) का सामना करना पड़ा था, लेकिन विराट का जवाब क्लीनिकल रहा: पहले सिडनी में 74*, और अब राँची में 135.

प्रतीकात्मक जश्न: शतक का जश्न सिर्फ़ रूटीन नहीं था; यह दबाव से मिली मुक्ति और ख़ुद पर एक बार फिर मुहर लगाने का पल था. यह शतक रूटीन नहीं था, यह आवश्यक था, और यह प्रतीकात्मक था.

135 रन की यह पारी उम्र, फ़ॉर्मेट या राजनीति की परवाह किए बिना दिखाती है कि विराट अभी भी दुनिया के सबसे भरोसेमंद, बुद्धिमान और फ़िट बल्लेबाज़ हैं.

पूर्व भारतीय मुख्य कोच रवि शास्त्री ने सबसे अच्छी बात कही:

यह है उनका 52वां शतक. बाउंड्री के साथ पूरा किया. हवा में मुक्का मारकर जश्न मनाया. यह इंतज़ार बहुत लंबा था. अब यह वही फ़ॉर्मेट है जिसे वह ज़्यादा खेलते हैं, और इस पारी ने कई लोगों को चुप करा दिया होगा. इस मैदान पर उनका तीसरा शतक. यह पारी शानदार थी, ख़ासतौर पर जिस अंदाज़ में वह पहुँचे—उस शॉट की टाइमिंग बस कमाल की थी.”

रोहित शर्मा की प्रतिक्रिया चर्चा का विषय
ड्रेसिंग रूम में मौजूद तत्कालीन कप्तान रोहित शर्मा की एक अनफ़िल्टर्ड और अत्यंत उत्साहित प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गई.

जैसे ही विराट कोहली ने अपना शतक पूरा किया, रोहित उत्साह में खड़े हो गए, जोरदार तालियाँ बजाईं, और उनकी खुशी के क्षणों में मुँह से निकले कुछ अपशब्द भी कैमरे में रिकॉर्ड हो गए.

यह दृश्य न केवल कोहली की उपलब्धि पर रोहित की सच्ची खुशी को दर्शाता है, बल्कि दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के बीच की समझ, सम्मान और गहरे साथ को भी उजागर करता है.

यह क्लिप क्रिकेट प्रेमियों के बीच तुरंत लोकप्रिय हो गई और मैच की सबसे यादगार झलकियों में से एक बनकर उभरी.

टेस्ट संन्यास की कड़वी सच्चाई
पारी के बाद जब हर्षा भोगले ने संन्यास के फ़ैसले को पलटने के बारे में पूछा, तो उन्होंने साफ़ इनकार करते हुए कहा कि वह अब रिटायरमेंट तक भारत के लिए वह ‘एक-फ़ॉर्मेट के खिलाड़ी’ हैं.

उनका टेस्ट संन्यास क्रिकेटिंग कारण से ज़्यादा राजनीतिक दबाव का परिणाम लगा:

विराट कोहली ने जनवरी 2022 में टेस्ट कप्तानी उस विवाद के बाद छोड़ी, जिसकी शुरुआत टी20 नेतृत्व से उनके स्वैच्छिक हटने से हुई थी.

सितंबर 2021 में उन्होंने टी20 कप्तानी छोड़ी, लेकिन वन डे इंटरनेशनल और टेस्ट कप्तानी जारी रखने की इच्छा जताई. इसके बावजूद, दिसंबर 2021 में बीसीसीआई ने उन्हें अचानक वन डे इंटरनेशनल की कप्तानी से हटा दिया और कोहली के अनुसार उन्हें यह निर्णय केवल 90 मिनट पहले बताया गया.

दक्षिण अफ्रीका दौरे पर हार के बाद, बढ़ते मतभेदों और इस पूरे प्रकरण से उपजी असहज स्थिति के कारण उन्होंने 15 जनवरी 2022 को टेस्ट कप्तानी भी छोड़ दी.

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