चीन का वो युद्धपोत जिसके अमेरिकी नौसेना को मज़बूत चुनौती देने के लग रहे हैं कयास

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फ़ुजियान देश का ऐसा तीसरा युद्धपोत है जिसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट की भी सुविधा है जो विमानों को अधिक गति से उड़ने की क्षमता देता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, इससे चीन अमेरिका के पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में प्रभुत्व को चुनौती देने के अपने लक्ष्य के और क़रीब पहुँच गया है.

फ़ुजियान नाम का यह पोत, जिसका वज़न 80,000 टन है और जिसका नाम ताइवान के सबसे निकट स्थित चीनी प्रांत पर रखा गया है,
70 विमानों को ले जा सकता है.

फ़ुयह चीन का पहला ऐसा विमानवाहक पोत है जिसमें समतल उड़ान डेक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट तकनीक है, जिसकी बदौलत यह भारी विमान लॉन्च कर सकता है, साथ ही अधिक ईंधन और हथियार ले जा सकता है. दुनिया में यह क्षमता केवल अमेरिका के पास है.

ताइवान के नेशनल सिक्योरिटी एंड डिफ़ेंस रिसर्च इंस्टीट्यूट के विलियम सी चुंग ने बीबीसी को बताया, “इससे चीन के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप एक नए स्तर पर पहुँच गए हैं, जो लियाओनिंग और शानडोंग से कहीं आगे हैं.”

चीन में ही तैयार हुए इस युद्धपोत से भारी हथियारों और ईंधन से लैस विमान उड़ान भर सकते हैं और दुश्मन के लक्ष्य पर लंबी दूरी से निशाना साध सकते हैंजियान चीनी नौसेना को नई पहुंच और लचीलापन प्रदान करने के साथ-साथ चीन के सामरिक इरादों का स्पष्ट संकेत भी देता है.
यह चीन के पहले से मौजूद दो युद्धपोतों लायोनिंग और शैन्डॉन्ग से भी ज़्यादा ताक़तवर है, यह दोनों युद्धपोत रूस की मदद से तैयार किए गए थे.

चुंग ने कहा, “बेशक, समतल डेक और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट विमान के टेकऑफ़ और लैंडिंग की क्षमता को काफ़ी बढ़ाते हैं. स्की-जंप प्लेटफॉर्म वाले डेक पर उड़ान भरते समय पायलटों को वज़न घटाने के लिए हथियार कम करने पड़ते हैं, जो अभियान की फ्लेक्सिबिलिटी को सीमित करता है.”

चीन के मीडिया ने फ़ुजियान को चीनी नौसेना के विकास में “एक बड़ा मील का पत्थर” बताया है.

बीबीसी से बातचीत में चुंग ने कहा कि अब चीन अमेरिका जैसी “गनबोट डिप्लोमैसी” भी कर सकेगा, और जैसा न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा, यह चीन के “रक्षात्मक आधुनिकीकरण” से “आक्रामक शक्ति के प्रक्षेपण” की ओर बढ़ने का संकेत है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा, “प्रशांत महासागर इतना बड़ा है कि उसमें अमेरिका और चीन दोनों के लिए जगह है.” यह बयान अमेरिका के साथ चीन की बराबरी की महत्वाकांक्षा को दिखाता है.

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने तेज़ी से अपनी नौसेना का विस्तार किया है और अब उसके पास दुनिया में सबसे अधिक जहाज़ हैं, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बढ़ रहा है.

सरकारी मीडिया के अनुसार, फ़ुजियान में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कैटापल्ट लगाने का निर्णय ख़ुद जिनपिंग ने लिया था. उन्होंने ही हैनान प्रांत में हुए भव्य उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता की थी.

डेक पर खड़े होकर शी ने सैन्य वर्दी में नाविकों को संबोधित करते हुए कहा: “पार्टी के आदेशों का पालन करो, जीत के लिए लड़ो, और उत्कृष्ट आचरण बनाए रखो!”

रणनीतिक महत्व और सीमाएं

ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने फ़ुजियान को एक “तेज़ प्रतिक्रिया देने वाली प्रतिरोधक शक्ति” बताया है, जो लड़ाकू विमानों और जल और ज़मीन पर भी आक्रमण कर सकता है.

चुंग ने कहा कि शांति के समय में भी फ़ुजियान की तैनाती अमेरिका के विमानवाहक पोतों जैसी ही प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करेगी.

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और किसी भी समय “इसे खुद में मिलाने” का इरादा जताता रहा है, चाहे इसके लिए बल प्रयोग ही क्यों न करना पड़े.

हडसन इंस्टीट्यूट के सतोरो नागाओ ने कहा कि फ़ुजियान ताइवान की पूर्वी रक्षा पंक्तियों के लिए ख़तरा पैदा कर सकता है. हालाँकि, अमेरिकी सैन्य ठिकाने- ओकिनावा, दक्षिण कोरिया, गुआम और फ़िलीपींस- किसी से भी चीन को जवाब देने में सक्षम हैं. इसके अलावा अमेरिका के सभी 11 विमानवाहक पोत परमाणु ऊर्जा से संचालित हैं.

इसके विपरीत, चीन के तीनों विमानवाहक पोत डीज़ल इंजन पर चलते हैं, जिन्हें बार-बार ईंधन भरने की आवश्यकता होती है, इससे उनकी युद्धक क्षमता सीमित होती है.

जापान के नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज़ के आइटा मोरिकी के अक्तूबर 2025 के आकलन में कहा गया कि चीन के सामने अभी भी कई तकनीकी और मानव संसाधन संबंधी चुनौतियाँ हैं.

चुंग ने माना, “फ़ुजियान और चीन के अन्य विमानवाहक पोतों की कुल युद्धक क्षमता और अनुभव अमेरिका से अभी काफी पीछे है.”

अमेरिकी रियर एडमिरल ब्रेट मियटस ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया, “उनके पास तीन विमानवाहक पोत हैं, हमारे पास 11. और हम यह काम कई दशकों से कर रहे हैं.”

हालांकि मिसाइल तकनीक से विमानवाहक पोतों का रणनीतिक महत्व कुछ कम हुआ है. फिर भी अगर ड्रोन (मानवरहित) के लिए एआई तकनीक पूरी तरह विकसित हो जाती है, तो विमानवाहक पोत और भी प्रभावी हो सकते हैं.

इस बीच, सैटेलाइट तस्वीरें दिखाती हैं कि चीन अपना चौथा विमानवाहक पोत भी बना रहा है और भविष्य में उसकी परमाणु-संचालित कैरियर लाने की योजना है.
विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अमेरिका और चीन के बीच आने वाले सालों में नौसैनिक हथियारों की दौड़ और तेज़ होगी.

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