सुपौल (बिहार) | विशेष रिपोर्ट
बिहार के सुपौल जिले से निकलकर एक युवा आज अपनी मेहनत और सुरों के दम पर पहचान बना रहा है। हम बात कर रहे हैं 19 वर्षीय भोजपुरी सिंगर नीतीश कुमार की, जिनके पिता का नाम सूरज पासवान है। नीतीश कुमार एक साधारण मजदूर परिवार से ताल्लुक रखते हैं और जीवन यापन के लिए मेहनत मजदूरी व बेलदारी का काम करते हैं, लेकिन उनके सपने सुरों से जुड़े हुए हैं।
नीतीश कुमार मूल रूप से सुपौल जिला के रहने वाले हैं, लेकिन रोज़गार के सिलसिले में इस समय मद्रास (तमिलनाडु) में काम कर रहे हैं। वे सील सिमलाइ बाजार के पास, कटाईया बैसाखी इलाके में रहते हैं और दिनभर मजदूरी करने के बाद खाली समय में संगीत की साधना करते हैं।
दोस्त ने खोली प्रतिभा की कहानी
नीतीश के करीबी दोस्त अनिल कुमार बताते हैं कि नीतीश को बचपन से ही गाने का शौक है।
अनिल कुमार के अनुसार,
“नीतीश बहुत अच्छा भोजपुरी गाना गाता है। भोजपुरी के साथ-साथ हिंदी सैड सॉन्ग भी इतनी भावनाओं के साथ गाता है कि सुनने वाला खुद को रोक नहीं पाता।”
भोजपुरी और हिंदी सैड सॉन्ग में खास पहचान
नीतीश कुमार की आवाज़ में दर्द, सच्चाई और ज़िंदगी का संघर्ष साफ झलकता है। यही वजह है कि जब वे भोजपुरी या हिंदी सैड सॉन्ग गाते हैं, तो लोग तुरंत उनसे जुड़ जाते हैं। मजदूरी के बीच गुनगुनाए गए उनके गीत आज आसपास के लोगों के बीच काफी पसंद किए जाने लगे हैं।
संघर्ष के साथ सपनों की उड़ान
कम उम्र में ही नीतीश ने जीवन की कठिनाइयों को करीब से देखा है। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने संगीत से नाता नहीं तोड़ा। उनका सपना है कि एक दिन वे एक पहचाने जाने वाले भोजपुरी सिंगर बनें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकें।
युवाओं के लिए प्रेरणा
नीतीश कुमार आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं, जो कठिन हालात में भी अपने हुनर को जिंदा रखते हैं। मजदूरी करते हुए संगीत की साधना करना यह साबित करता है कि अगर जज़्बा मजबूत हो, तो रास्ता जरूर निकलता है।
आज जरूरत है ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं को मंच और सहयोग देने की, ताकि बिहार और देश का नाम रोशन हो सके।

