ईद से पहले पसरा मातम, एक ही आंगन में दो सगी बहनों की मौत, किसान के तीन बैल भी मरे
एक ही आंगन से उठेंगी दो सगी बहनों की अर्थियां,
दोनों बहने संजय भुईयां से थी विवाहित,वज्रपात ने उजाड़ा संजय भुइयां का संसार
चतरा। जिले में शुक्रवार का दिन किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं रहा। बेमौसम बारिश के साथ गिरे आसमानी कहर ने जिले के अलग-अलग प्रखंडों में भारी तबाही मचाई है। कहीं एक ही आंगन से दो सगी बहनों की अर्थियां उठने की नौबत आ गई, तो कहीं ईद की खुशियां मातम में बदल गईं। इतना ही नहीं, पशुधन पर भी बिजली का कहर टूटा, जिससे गरीब किसान की कमर टूट गई है। प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं, लेकिन पूरे जिले में दहशत और गम का माहौल है।पहली और सबसे मर्माहत करने वाली घटना पत्थलगड़ा प्रखंड के सुदूरवर्ती मेराल पंचायत स्थित जेहरा गांव की है। यहां घर के आंगन में काम कर रही दो सगी बहनें, पूनम देवी और कल्याणी देवी, अचानक हुए वज्रपात की सीधी चपेट में आ गईं। ये दोनों बहनें न केवल सगी बहनें थीं, बल्कि एक ही पति, संजय भुइयां, से विवाहित थीं। संजय की दोनों पत्नियों की एक साथ मौत ने उसके पूरे संसार को उजाड़ कर रख दिया है। एक ही आंगन में दो सगी बहनों की लाशें देख गांव का हर शख्स रो पड़ा। कुदरत की क्रूरता का दूसरा मंजर सिंघानी गांव में दिखा। यहां मोहम्मद महफूज अपनी पत्नी सम्मा परवीन और अन्य परिजनों के साथ बंदरचुम्मा पाही में महुआ चुन रहे थे। तभी अचानक बिजली गिरने से सम्मा परवीन की मौके पर ही मौत हो गई। ईद के त्योहार से ठीक पहले हुए इस हादसे ने परिवार की खुशियां आंसुओं में डुबो दी हैं। इस घटना में 50 वर्षीय जैबुन निशा और एक 10 वर्षीय बच्ची भी गंभीर रूप से झुलस गई हैं। सीओ उदल राम और पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि परिजन शव का पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं हैं। वहीं, जिले के कुंदा प्रखंड के पिंजनी गांव में भी वज्रपात ने एक गरीब किसान की रोजी-रोटी छीन ली। किसान नागेंद्र गंझू के तीन बैल बारिश से बचने के लिए एक पेड़ के नीचे खड़े थे, तभी अचानक पेड़ पर बिजली गिरी और तीनों बैलों की मौके पर ही मौत हो गई। खेती के सीजन से ठीक पहले बैलों का मरना नागेंद्र के लिए एक बड़े आर्थिक संकट जैसा है।पत्थलगड़ा से लेकर कुंदा तक, ग्रामीण अब सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग से उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या खुले मैदानों से दूर रहें। चतरा के लिए यह शुक्रवार वाकई एक काली त्रासदी के रूप में दर्ज हो गया है।

