उन्नाव जिले के आचमन थाना क्षेत्र अंतर्गत सिंधोरा गांव से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां 34 वर्षीय सुधीर कुमार को गांव में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। सुधीर का आरोप है कि गांव के कुछ लोगों ने उन्हें खुलेआम धमकी दी है कि यदि वह गांव लौटे तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। इस भय के कारण वह पिछले 6 वर्षों से अपने परिवार से दूर रहकर जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
पीड़ित सुधीर कुमार ने बताया कि करीब 8 वर्ष पहले उन्होंने अपने परिवार की सहमति से विवाह किया था। हालांकि वैवाहिक जीवन केवल 2 वर्ष ही चल पाया और आपसी सहमति से दोनों ने तलाक ले लिया। इस दौरान कोई विवाद या कानूनी झगड़ा नहीं हुआ और दोनों पक्षों की रजामंदी से अलगाव हुआ था। इसके बावजूद गांव के कुछ लोगों ने इसे मुद्दा बनाकर उन्हें सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया।
सुधीर का कहना है कि तलाक के बाद गांव वालों ने उन्हें गांव से बाहर कर दिया और तब से वह राजकोट क्षेत्र में रह रहे हैं। हाल ही में करीब 4-5 महीने पहले उनके पिता ने उन्हें फोन कर घर वापस आने के लिए कहा, लेकिन इसी बीच गांव के कुछ लोगों ने उन्हें फोन कर धमकाया और गांव आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।
पीड़ित युवक का दर्द है कि जहां गांव में अन्य लोग भागकर शादी करने के बाद भी सामान्य रूप से रह रहे हैं, वहीं उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब उनका विवाह और तलाक दोनों ही परिवार की सहमति से हुआ, तो उन्हें सजा क्यों दी जा रही है।
सुधीर कुमार ने प्रशासन और मीडिया से मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि वह केवल अपने परिवार से मिलना चाहते हैं और अपने ही गांव में सम्मानपूर्वक रहना चाहते हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को उजागर करने के लिए वीडियो भी जारी किया है, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस सहायता नहीं मिल पाई है।
इस घटना ने गांव में सामाजिक दबाव और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या सुधीर को उनके अधिकार दिला पाता है या नहीं।

