सिंगरौली में रजिस्ट्री घोटाले का बड़ा खुलासा: लाखों की स्टांप ड्यूटी में हेराफेरी, सब-रजिस्ट्रार पर गंभीर आरोप

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सिंगरौली। जिले के सरई नगर परिषद अंतर्गत ग्राम इटवा में भूमि रजिस्ट्री को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है कि सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हुए लाखों रुपए की स्टांप ड्यूटी में हेराफेरी की गई है। इस पूरे मामले में रजिस्ट्री कार्यालय सिंगरौली के सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार, हल्का पटवारी और रजिस्ट्री लेखक पूजा पांडे की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार, ग्राम इटवा की आराजी नंबर 202/2, कुल रकबा 0.5 हेक्टेयर (लगभग 12.5 डिसमिल) भूमि पहले से ही आबादी क्षेत्र में आती है, जहां दो छत का पक्का मकान निर्मित है। नियमों के मुताबिक इस प्रकार की संपत्ति पर लगभग 3 लाख रुपए तक की स्टांप ड्यूटी देय थी, लेकिन आरोप है कि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से इसे कृषि भूमि दर्शाकर मात्र 58,959 रुपए में रजिस्ट्री कर दी गई। यह रजिस्ट्री 19 सितंबर 2025 को संपन्न कराई गई।

क्रेता से वसूले 3 लाख, शासन को मिला कम राजस्व
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रजिस्ट्री लेखक द्वारा क्रेता से लगभग 3 लाख रुपए स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क के नाम पर वसूले गए, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में इससे काफी कम राशि जमा कराई गई। इससे यह आशंका गहराती है कि शेष राशि का गबन किया गया है।

सब-रजिस्ट्रार पर गंभीर आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार पिछले करीब 10 वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ हैं और उनके कार्यकाल में इस तरह की अनियमितताएं लगातार सामने आती रही हैं। यहां तक कि उनके कथित बयान को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर रोजाना 2 लाख रुपए की कमाई का लक्ष्य पूरा होने तक कार्यालय में बैठने की बात कही।

पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी सरई नगर परिषद के ग्राम घोघरा में आराजी नंबर 192/3, 195/3, 1176/2, 1196/3 और 288/3 (कुल रकबा 1 एकड़ 22 डिसमिल) की भूमि को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि रामखेलावन जायसवाल की जमीन, जो प्रतिबंधित श्रेणी में थी, उसे कथित तौर पर 1 लाख रुपए लेकर कुसुम कली जायसवाल के नाम रजिस्ट्री कर दी गई।

कैमरे से दूर रिश्वत का खेल?
सूत्रों का दावा है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर रिश्वत सीधे हाथ में न लेकर फाइलों के भीतर रखकर ली जाती है, ताकि कोई सबूत सामने न आ सके।

जांच की मांग तेज
मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल राजस्व की बड़ी चोरी का मामला होगा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।

(संवाददाता: रमेश चंद्र जायसवाल, सिंगरौली

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