कलाहांडी में सूखे का तांडव: रिंजा पंचायत में 42 डिग्री की तपिश से झुलसी धान-रबी फसल, किसान बेहालदेवगांव, कलाहांडी
कलाहांडी जिले की रिंजा पंचायत के देवगांव में सूखे ने ऐसा कहर बरपाया है कि किसान खून के आंसू रोने को मजबूर हैं। उटेई नदी के किनारे बसी इस पंचायत के 20 हेक्टेयर से ज्यादा खेतों में खड़ी धान और रबी की फसल पानी के अभाव में पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।खेत बने रेगिस्तान, 42°C में झुलस रही उम्मीदें
पिछले एक हफ्ते से तापमान 42 डिग्री पार कर चुका है। आसमान से आग बरस रही है और जमीन तपे तवे जैसी हो गई है। इंद्रावती जलाशय में पानी का स्तर 642 मीटर से गिरकर 631.99 मीटर पहुंच गया है। लेफ्ट और राइट नहरों में भी पानी आधे से कम बह रहा है। नतीजा – उटेई नदी किनारे देवगांव के खेतों तक पानी पहुंच ही नहीं रहा।”साहब, अब क्या खाएंगे?” –

किसानों की रूह कंपा देने वाली पुकार
गांव के किसान बताते हैं, “धान की बालियां सूखकर खड़ी-खड़ी दम तोड़ रही हैं। रबी की फसल तो खेत में ही जल गई। बैंक का कर्जा, बीज-खाद का खर्चा… सब डूब गया। बच्चों का पेट कैसे भरेंगे?” कई खेतों में दरारें पड़ चुकी हैं। हरियाली की जगह अब धूल के गुबार उड़ रहे हैं।पूरे कलाहांडी में हाहाकार
सिर्फ रिंजा नहीं, धरमगढ़, जयपतना, कोक्सरा ब्लॉक के 296 गांवों में 53,374 हेक्टेयर में सिंचाई संकट गहरा गया है। हाटी नदी में पानी छोड़ना बंद होने से पीने के पानी का संकट भी मुंह बाए खड़ा है।प्रशासन क्या कर रहा है?
किसानों का आरोप है कि लिफ्ट इरिगेशन पॉइंट खराब पड़े हैं और कोई सुध लेने वाला नहीं। उधर, विशेषज्ञों का कहना है कि कलाहांडी देश के सबसे ज्यादा सूखा प्रभावित जिलों में से एक है। हर साल पानी की कमी से हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद होती है।
मदद की आस
फिलहाल किसान सरकार से 13,500 रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे और खराब पड़े LI पॉइंट तुरंत चालू करने की मांग कर रहे हैं। अगर अगले 7 दिन में बारिश नहीं हुई या नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया, तो रबी सीजन पूरी तरह चौपट हो जाएगा।सूखे की मार झेल रहे किसान पूछ रहे हैं – “क्या हमारी सुनवाई होगी, या हर साल की तरह इस बार भी हम बर्बाद हो जाएंगे?”

