नागौर में जमीन विवाद से उठी आवाज, तस्करी, भ्रष्टाचार और सामाजिक बहिष्कार के गंभीर दावे

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पीड़ित ने लगातार शिकायतों में लगाए संगठित अपराध, रिश्वतखोरी, बाल विवाह और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग

लगातार शिकायतों से उभरा बड़ा मामला
राजस्थान के नागौर जिले के खींवसर क्षेत्र के भेड़ गांव से एक व्यक्ति द्वारा की गई लगातार शिकायतों ने कई गंभीर आरोपों को जन्म दिया है। ओमप्रकाश भाम्बू नामक व्यक्ति ने अलग-अलग तिथियों पर प्रशासन को भेजे गए प्रार्थना पत्रों में आरोप लगाया है कि वह लंबे समय से मानसिक, सामाजिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों के आरोप
शिकायत में दावा किया गया है कि क्षेत्र में दलालों, तस्करों और आपराधिक तत्वों का संगठित नेटवर्क सक्रिय है। आरोपों के अनुसार, ये लोग अवैध हथियार रखने, डोडा पोस्त, जाली नोट, नकली घी-तेल और अन्य अवैध कारोबार में शामिल हैं। साथ ही पंचायत चुनाव में पैसे के बल पर वोट खरीदने जैसे आरोप भी सामने आए हैं।

पुलिस और प्रशासन पर गंभीर सवाल
पीड़ित ने पांचौड़ी और खींवसर थाना पुलिस पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई बार सूचना देने के बावजूद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई नहीं की। इसके चलते स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सामाजिक बहिष्कार और भेदभाव के आरोप
ओमप्रकाश भाम्बू ने आरोप लगाया है कि उन्हें गांव में सामाजिक रूप से बहिष्कृत करने की कोशिश की जा रही है। सार्वजनिक स्थानों, यहां तक कि मंदिर में प्रवेश तक रोका जा रहा है। उनका दावा है कि गरीब वर्ग के लोगों के साथ भी भेदभाव किया जा रहा है और उन्हें बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है।

बाल विवाह और कुप्रथाओं का मुद्दा
शिकायत में हाल ही में एक नाबालिग लड़की के जबरन बाल विवाह का आरोप भी शामिल है। पीड़ित का कहना है कि सूचना देने के बावजूद पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। इसके अलावा मृत्युभोज जैसी कुप्रथाओं में शामिल न होने के कारण भी उनके खिलाफ षड़यंत्र रचे जाने का आरोप लगाया गया है।

शिक्षा व्यवस्था में अनियमितताओं का दावा
प्रार्थना पत्र में स्थानीय स्कूलों में भी घोटाले और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि कुछ निजी विद्यालय बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं और बच्चों से मनमानी फीस वसूली जा रही है। साथ ही स्कूली वाहनों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी का भी जिक्र किया गया है।

सबूत मिटाने और धमकियों का आरोप
पीड़ित का दावा है कि उनके मोबाइल में मौजूद कॉल रिकॉर्डिंग और वीडियो सबूतों को विरोधी पक्ष द्वारा डिलीट कर दिया गया। साथ ही, उनके द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज और शिकायत पत्र भी छीन लिए गए।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
ओमप्रकाश भाम्बू ने प्रशासन से मांग की है कि बिना पूर्व सूचना के इलाके में जांच और छापेमारी की जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि उन्हें और अन्य गरीब लोगों को तत्काल सुरक्षा और न्याय की आवश्यकता है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस पूरे मामले में अब तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लगाए गए गंभीर आरोपों पर जांच होती है या नहीं और सच्चाई क्या निकलकर सामने आती है।

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