सिंगरौली में पीएम आवास योजना पर बड़ा विवाद, पात्रों को किया बाहर, अपात्रों को सूची में शामिल करने का आरोप

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सिंगरौली जिले की सरई नगर परिषद में प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। योजना में कथित अनियमितताओं और हेराफेरी के आरोपों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।

जानकारी के अनुसार सरई नगर परिषद क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तैयार की गई हितग्राहियों की सूची में कई ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं, जिन्हें अपात्र बताया जा रहा है, जबकि वास्तविक पात्र और जरूरतमंद परिवारों को योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया है। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

बताया जा रहा है कि कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री आवास योजना में गड़बड़ी की शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सूची तैयार करने में नियमों की अनदेखी कर प्रभावशाली और अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। शिकायत के बाद मामला गंभीर मानते हुए देवसर एसडीएम स्तर पर जांच के लिए टीम गठित करने का प्रस्ताव रखा गया था।

हालांकि जांच प्रक्रिया के दौरान वार्ड क्रमांक 14 के 39 हितग्राहियों को लेकर स्थिति विवादित बनी रही। आरोप है कि जांच में इन हितग्राहियों को पात्र घोषित कर मामला बंद कर दिया गया, जबकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सूची में शामिल कई नाम जांच के दायरे में आने चाहिए थे और निष्पक्ष सत्यापन जरूरी था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब और बेघर परिवारों के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन यदि पात्र लोगों को वंचित कर अपात्रों को लाभ दिया जा रहा है तो यह योजना के मूल उद्देश्य के विपरीत है। लोगों ने आरोप लगाया कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो बड़े स्तर पर गड़बड़ी उजागर हो सकती है।

अब शिकायतकर्ताओं ने एक बार फिर जिला कलेक्टर से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पीएम आवास योजना की सूची की दोबारा समीक्षा की जाए ताकि वास्तविक पात्र हितग्राहियों को न्याय मिल सके। साथ ही जिन अधिकारियों ने जांच में लापरवाही बरती या गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की, उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाए।

फिलहाल यह मामला प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की नजर जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।

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