राजस्थान के Didwana Kuchaman District में पास केरपुरा गांव मे एक भूमि हड़पने कि स्थिति इस स्तर तक पहुंच गई कि विरोधी पक्ष को Fake रेप केस में फंसाने की धमकियाँ दी गईं। इस पूरे घटनाक्रम में बनवारी उर्फ विनोद गौड़ का नाम सामने आता है, जहां विवाद को बढ़ाने के लिए परिवार की महिलाओं को आगे किया गया। सौभाग्य से इस पूरे घटनाक्रम का CCTV वीडियो सामने आना एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ। इसने न केवल घटनाओं का वास्तविक क्रम सामने रखा, बल्कि यह भी दिखाया कि किस तरह एकतरफा धारणा बनाकर किसी पुरुष को आसानी से दोषी ठहराया जा सकता था। अक्सर देखा जाता है कि ऐसे मामलों में बिना पूरी जांच के ही पुरुषों के प्रति संदेह और सामाजिक दबाव बन जाता है..
इस क्रम में तन्नू गौड़ और काजल गौड़ सामने आकर गालियाँ देती हैं, अश्लील इशारे करती हैं और लगातार उकसाने का प्रयास करती दिखाई देती हैं। घटना का CCTV फुटेज मौजूद है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति उनके सामने शांत खड़ा है, जबकि दूसरी तरफ से लगातार अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। बाद में उसी व्यक्ति के साथ मारपीट भी होती है।
ऐसी स्थिति में यह बिंदु उठता है कि जो व्यक्ति सार्वजनिक जगह पर बिना किसी प्रतिक्रिया के खड़ा है और लगातार गालियाँ व अश्लील इशारे सह रहा है, वह उसी परिस्थिति में अचानक कोई अपराध कैसे कर सकता है , साथ ही, जब पहले से ही रेप केस में फंसाने की बात कही जा चुकी हो और उसी संदर्भ में घटनाएँ आगे बढ़ती दिखें, तो पूरे मामले की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
यह घटना इस बात को उजागर करती है कि कभी-कभी पुरुषों के प्रति भी अन्याय या शोषण जैसी स्थितियाँ बन सकती हैं, जिन पर समाज कम ध्यान देता है। इसलिए जरूरी है कि हर मामले में निष्पक्ष जांच हो, केवल आरोपों के आधार पर नहीं बल्कि ठोस साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाए, ताकि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिले और किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।
ई खबर मीडिया से निर्भय सिंह की रिपोर्ट

