बाराबंकी। जिले में मोटरसाइकिल चोरी के एक मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक तरफ पीड़ित युवक अपनी बाइक चोरी होने की शिकायत लेकर थानों और अधिकारियों के चक्कर काटता रहा, वहीं पुलिस जांच में पूरे मामले को “गाड़ी कहीं और खड़ी कर भूल जाने” का मामला बताकर कार्रवाई से हाथ खड़े करती नजर आई। अब इस प्रकरण को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का बाजार गर्म है।
मामला थाना कोतवाली नगर क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता उमाशंकर पुत्र टहलू निवासी सेवकीपुरवा थाना जैदपुर ने आरोप लगाया कि वह 19 फरवरी 2026 को अपने साले रामखेलावन की प्लेटिना मोटरसाइकिल संख्या UP 32 DA 8614 से बाराबंकी कचहरी मुकदमे की पैरवी करने आया था। उमाशंकर के अनुसार उसने बाइक डीएम आवास के सामने तहसील कॉलोनी की पटरी पर खड़ी की थी और वकील से मिलने चला गया। वापस लौटने पर बाइक गायब थी। काफी तलाश के बाद भी जब वाहन नहीं मिला तो उसने अज्ञात चोरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए शिकायत दी।
पीड़ित का कहना है कि उसने पहले स्थानीय पुलिस और बाद में पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन कई दिनों बाद भी न तो मुकदमा दर्ज हुआ और न ही बाइक की तलाश शुरू की गई। इसके बाद मामला आईजीआरएस पोर्टल तक पहुंचा, जहां पुलिस द्वारा जांच आख्या प्रस्तुत की गई।
जांच रिपोर्ट में उपनिरीक्षक ललित कुमार ने दावा किया कि मौके पर पूछताछ के दौरान किसी व्यक्ति ने बाइक खड़ी होने या चोरी की घटना की पुष्टि नहीं की। आसपास मौजूद मोटरसाइकिल मैकेनिक जितेंद्र यादव और जूस विक्रेता मुन्ना से पूछताछ की गई, लेकिन दोनों ने घटना की जानकारी होने से इनकार कर दिया। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच का भी हवाला दिया और कहा कि फुटेज में शिकायतकर्ता के दावे की पुष्टि नहीं हुई।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में यह तक लिख दिया कि शिकायतकर्ता संभवतः अपने रिश्तेदार की बाइक कहीं और खड़ी कर भूल गया होगा और अपने बचाव में “बढ़ा-चढ़ाकर” शिकायत प्रस्तुत की है। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि मामले में किसी कार्रवाई की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि बाइक वास्तव में चोरी हुई है तो पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई क्यों नहीं की? वहीं अगर शिकायतकर्ता का दावा गलत था तो बाइक आखिर कहां गई? स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना मुकदमा दर्ज किए केवल अनुमान के आधार पर शिकायत को खारिज करना गंभीर लापरवाही माना जा सकता है।
पीड़ित उमाशंकर ने आरोप लगाया है कि पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। उसने उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराकर बाइक बरामद करने और अज्ञात चोरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। इस पूरे मामले ने जिले में पुलिस जांच प्रक्रिया और आईजीआरएस निस्तारण की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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