अयोध्या में सरकारी नाली की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप, बुजुर्ग किसान ने मंडलायुक्त से लगाई निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की गुहार

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अयोध्या

अयोध्या जनपद के बीकापुर तहसील क्षेत्र के ग्राम गौहानी खुर्द में सरकारी नाली की जमीन को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। 73 वर्षीय किसान उदयभान उपाध्याय ने मंडलायुक्त अयोध्या को शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों और गांव के प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से सरकारी नाली को अवैध रूप से जोतकर समाप्त कर दिया गया, जिससे उनकी भूमि और खड़ी फसल को भी नुकसान पहुंचा है। पीड़ित ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित उदयभान उपाध्याय का कहना है कि वह ग्राम गौहानी खुर्द, थाना हैदरगंज, तहसील बीकापुर के निवासी हैं तथा गाटा संख्या 1211 के भूमिधर हैं। उनके अनुसार इस गाटा के उत्तरी हिस्से में पूर्व से पश्चिम दिशा तक सरकारी नाली बनी हुई थी, जिसका उपयोग वर्षों से जल निकासी के लिए किया जाता रहा है।

आरोप है कि गांव के कुछ लोगों के दबाव में राजस्व विभाग की टीम बिना किसी पूर्व सूचना के मौके पर पहुंची और ग्राम प्रधान की सहायता से ट्रैक्टर चलवाकर सरकारी नाली को जोत दिया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस कार्रवाई के दौरान उनके खेत का कुछ हिस्सा भी प्रभावित हुआ और खेत में लगी गन्ने की फसल तथा पशुओं के लिए बोई गई चरी पूरी तरह नष्ट कर दी गई।

पीड़ित का कहना है कि जब ग्रामीणों से सूचना मिलने पर वह मौके पर पहुंचे और इसका विरोध किया तो कथित रूप से राजस्व टीम ने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अधिकारियों ने उन्हें प्रधान से बात करने की सलाह देते हुए मौके से चले जाने को कहा।

उदयभान उपाध्याय का कहना है कि यदि सरकारी नाली की जमीन पर इस प्रकार कब्जा कर उसे समाप्त किया जाता है तो भविष्य में जल निकासी की गंभीर समस्या उत्पन्न होगी और किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उनका आरोप है कि सरकारी भूमि पर नियमों के विपरीत कार्य कराया गया है, जिसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

पीड़ित परिवार और ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, सरकारी नाली की वास्तविक स्थिति का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सत्यापन कराया जाए, यदि किसी प्रकार का अवैध कब्जा या अनियमितता पाई जाती है तो उसे तत्काल हटाया जाए तथा सरकारी भूमि और किसानों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिन अधिकारियों या व्यक्तियों की भूमिका जांच में सामने आए, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

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