74 साल पहले समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हुए पैन एम क्लिपर एंडेवर विमान का मलबा आधुनिक अंडरवॉटर ड्रोन से 2000 फीट गहराई में मिला। इस हादसे ने विमान सुरक्षा नियमों, अनिवार्य सेफ्टी ब्रीफिंग और बेहतर लाइफ जैकेट जैसी व्यवस्थाओं की नींव रखी थी।
74 साल बाद समुद्र में मिला पैन एम क्लिपर एंडेवर विमान का मलबा।
इसी हादसे के बाद उड़ानों में सुरक्षा ब्रीफिंग और लाइफ जैकेट नियम बदले गए।
खोज से MH370 जैसे समुद्री विमान हादसों के पीड़ित परिवारों को नई उम्मीद मिली।
ओमाहा: करीब 74 साल पहले समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त हुए पैन एम के क्लिपर एंडेवर (Pan Am Clipper Endeavor) विमान का मलबा आखिरकार मिल गया है। यह खोज सिर्फ एक पुराने प्लेन के मलबे को ढूंढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक हवाई यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था से भी जुड़ी हुई है। यही वह दुर्घटना थी, जिसने आज हर उड़ान से पहले यात्रियों को दी जाने वाली सेफ्टी ब्रीफिंग और बेहतर लाइफ जैकेट जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत को दुनिया के सामने रखा। इस हादसे के बाद दुनिया में एविएशन से जुड़े कई बड़े नियम बदल गए थे।
आखिर क्या हुआ था उस दिन?
यह हादसा गुड फ्राइडे, 1952 को हुआ था। पैन एम का डीसी-4 क्लिपर एंडेवर विमान समुद्र में इमरजेंसी लैंडिंग करने के बाद कुछ ही मिनटों में डूब गया था। जांच में सामने आया कि विमान की पानी पर लैंडिंग के बाद सभी यात्री और क्रू के सदस्य जिंदा थे, लेकिन इसके बाद अफरा-तफरी मच गई। कई यात्री समुद्र में उतरने से डर रहे थे, उन्हें लाइफ जैकेट नहीं मिल रही थी और क्रू को भी लाइफ राफ्ट या बचाव नौका बाहर निकालने में दिक्कत हुई। इसी अफरा-तफरी के बीच कुछ ही मिनटों में विमान डूब गया। इस हादसे में 52 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 12 यात्री और क्रू के 5 सदस्य किसी तरह बच गए थे।
हादसे ने कैसे बदल दिए सुरक्षा के नियम?
आज हर उड़ान से पहले फ्लाइट अटेंडेंट यात्रियों को बताते हैं कि आपात स्थिति में निकास द्वार कहां हैं, लाइफ जैकेट कैसे पहननी और फुलानी है तथा अन्य सुरक्षा उपाय क्या हैं। एविएशन सेप्टी एक्सपर्ट जॉन कॉक्स के मुताबिक, क्लिपर एंडेवर हादसा आधुनिक विमान सुरक्षा व्यवस्था का एक बड़ा मोड़ साबित हुआ। उन्होंने कहा कि इसी घटना ने पानी में तैरने वाले बेहतर सुरक्षा उपकरण और उड़ान से पहले अनिवार्य सेफ्टी ब्रीफिंग जैसे कदमों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मुताबिक यह दुर्घटना विमान सुरक्षा के विकास की दिशा में एक अहम पड़ाव थी।
74 साल बाद कैसे मिला विमान का मलबा?
इस विमान को खोजने की शुरुआत 2019 में हुई। शोधकर्ता रस मैथ्यूज का ध्यान इस हादसे की ओर तब गया, जब उन्होंने पढ़ा कि इस विमान का एक लगेज टैग फ्लोरिडा के तट पर बहकर पहुंचा था। इसके बाद उन्होंने इस ऐतिहासिक दुर्घटना पर गहराई से रिसर्च शुरू की। उन्होंने कई साल तक पैन एम एयरलाइंस, अमेरिकी कोस्ट गार्ड और उस समय की जांच एजेंसी सिविल एरोनॉटिक्स बोर्ड के रिकॉर्ड खंगाले। सबसे अहम सुराग उन्हें प्यूर्टो रिको में हुई दुर्घटना संबंधी सुनवाई के रिकॉर्ड और उस नक्शे से मिला, जिसे अमेरिकी एयरफोर्स के उन पायलटों ने तैयार किया था जिन्होंने प्रशिक्षण उड़ान के दौरान इस हादसे को अपनी आंखों से देखा था।
दूसरी कोशिश में मिला विमान का मलबा
साल 2024 में विमान को खोजने की पहली कोशिश खराब मौसम की वजह से सफल नहीं हो सकी। उस समय टो किए जाने वाले सोनार सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था। इस अभियान की शूटिंग डिस्कवरी चैनल के कार्यक्रम ‘एक्सपेडिशन अननोन’ के लिए भी की गई थी। इसके बाद रस मैथ्यूज और उनकी एयर/सी हेरिटेज फाउंडेशन की टीम ने तय किया कि दुर्घटना की 75वीं वर्षगांठ से पहले एक बार फिर कोशिश की जाएगी। इस बार उन्होंने ऐसे आधुनिक ऑटोनॉमस अंडरवॉटर ड्रोन को इस्तेमाल करने का प्लान बनाया, जिन्हें मूल रूप से समुद्र के भीतर बारूदी सुरंगें खोजने जैसे सैन्य कार्यों के लिए विकसित किया गया था।
अंडरवॉटर ड्रोन की रही अहम भूमिका
समुद्री खोज कंपनी डीप सी विजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टोनी रोमियो पहले से ही रस मैथ्यूज के संपर्क में थे। संयोग से अप्रैल में उनकी कंपनी का एक जहाज दूसरे मिशन पर जाते समय प्यूर्टो रिको के पास से गुजर रहा था और उसके पास अत्याधुनिक अंडरवॉटर ड्रोन भी मौजूद था। रोमियो ने बताया कि मौसम अच्छा था, सही टीम और सही उपकरण मौजूद थे, इसलिए उन्होंने सर्च ऑपरेशन शुरू करने का फैसला किया। रोमियो ने बताया कि इस मिशन से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव भी था, क्योंकि उनके पिता पैन एम एयरलाइंस में मैकेनिक और पायलट रह चुके थे। यहां तक कि जिस ड्रोन से खोज की गई, उस पर पहले से ही पैन एम का एक स्टिकर भी लगा हुआ था।
अंडरवॉटर ड्रोन ने पहले ही चक्कर में विमान के मलबे को खोज निकाला था।
पहले ही चक्कर में मिल गया मलबा
शोधकर्ताओं ने वर्षों की रिसर्च, पुराने मौसम के आंकड़ों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर करीब 10 वर्ग समुद्री मील का सर्च एरिया तय किया। अंडरवॉटर ड्रोन ने पहले ही चक्कर में विमान के मलबे को खोज लिया। हालांकि टीम को इसका पता तब चला, जब ड्रोन सतह पर लौटकर अपनी तस्वीरें लेकर आया। इन तस्वीरों में समुद्र की लगभग 2000 फीट गहराई पर विमान का धड़ यानी फ्यूजलेज और टेल सेक्शन साफ दिखाई दिए। इस पूरे ऑपरेशन को फिर से डिस्कवरी चैनल के प्रेजेंटर जोश गेट्स और उनकी टीम ने रिकॉर्ड किया है। इस खोज पर आधारित स्पेशल एपिसोड इस साल प्रसारित किया जाएगा।
MH370 जैसे मामलों के लिए क्यों अहम है यह खोज?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि 74 साल पुराने पैन एम क्लिपर एंडेवर विमान का मलबा मिलना केवल एक ऐतिहासिक खोज नहीं, बल्कि समुद्र में लापता विमानों की तलाश के लिए भी बड़ी उम्मीद है। उनका कहना है कि इससे उन परिवारों को नई आशा मिलेगी, जो वर्षों से अपने प्रियजनों के बारे में किसी ठोस जानकारी का इंतजार कर रहे हैं। खासकर मलेशिया एयरलाइंस की फ्लाइट MH370 के यात्रियों से जुड़े परिवारों के लिए, जो करीब 12 साल पहले 269 लोगों के साथ रहस्यमय ढंग से गायब हो गई थी।

