उदयपुर। राजस्थान के उदयपुर जिले की फलासिया तहसील स्थित ग्राम पंचायत आमीवाड़ा के वेलवा डाड़मिया फला में संचालित मां-बाड़ी केंद्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्वास्थ्य परियोजना अधिकारी सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर मिलीभगत, फर्जी नामांकन, नियमों की अनदेखी और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में हाल ही में मां-बाड़ी केंद्र शुरू किया गया, लेकिन केंद्र के संचालन से पहले ही चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि तहसील स्तर के अधिकारियों और संविदाकर्मियों ने मिलीभगत कर बिना ग्रामवासियों को जानकारी दिए समिति का गठन कर लिया। इतना ही नहीं, अनपढ़ महिलाओं को सदस्य बनाकर समिति के महत्वपूर्ण पद अपने चहेतों को सौंप दिए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि अध्यक्ष के रिश्तेदार को शिक्षक और उसके परिजन को भोजन बनाने के कार्य पर नियुक्त कर नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2025 में मां-बाड़ी केंद्र में प्रवेश योग्य बच्चे मौजूद नहीं थे, इसके बावजूद पूर्व से दूसरे विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों का नाम फर्जी तरीके से दर्ज कर सरकारी भुगतान उठा लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा खेल संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका पैदा हो गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब इस पूरे मामले का विरोध कर शिकायत दर्ज कराई गई तो कार्रवाई करने के बजाय वर्ष 2026 में पुराने बच्चों के नाम हटाकर दूसरे गांवों के बच्चों का नाम दर्ज कर रिकॉर्ड बदलने का प्रयास किया गया। जबकि संबंधित गांवों में पहले से ही स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद भी निष्पक्ष जांच नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित स्वास्थ्य परियोजना अधिकारी पर रिश्वत लेकर निर्णय प्रभावित करने के आरोप लग रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी विवाद के चलते गांव में तनाव का माहौल है और अध्यक्ष के परिवार तथा अन्य ग्रामीणों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, फर्जी नामांकन, नियुक्तियों और भुगतान की जांच की जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और ग्रामीणों का विश्वास कायम रखने के लिए दोषियों पर कार्रवाई आवश्यक है।
समाचार लिखे जाने तक संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। समाचार में प्रकाशित आरोप ग्रामीणों द्वारा दिए गए ज्ञापन पर आधारित हैं। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

