सम्भल जिले की तहसील गुन्नौर के रघुपुर पुख्ता और ग्राम समशपुर गंगा क्षेत्र में ग्राम समाज की भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्षों से अधिकारियों के चक्कर काट रहे ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार शिकायतें, उच्च अधिकारियों के निर्देश और राजस्व न्यायालय के आदेश के बावजूद सरकारी भूमि को पूरी तरह कब्जामुक्त नहीं कराया गया। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
शिकायतकर्ता मनोहर पुत्र बाबूराम, बाबा रामदास पुत्र शिवमूर्ति सहित अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि सत्यवीर सिंह चिकारा ने ग्राम समाज की भूमि के साथ-साथ कुछ पट्टेदारों की जमीन पर भी कथित रूप से अवैध कब्जा कर लिया। आरोप है कि सरकारी भूमि पर कृषि कार्य करने के अलावा पक्का निर्माण भी कराया गया, जिससे सार्वजनिक भूमि का स्वरूप बदल गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला कोई नया नहीं, बल्कि वर्ष 2021 से लगातार विभिन्न सरकारी कार्यालयों में उठाया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्होंने तहसील दिवस, एसडीएम गुन्नौर, तहसीलदार, जिलाधिकारी सम्भल, मुरादाबाद मंडल के आयुक्त, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय, राज्यपाल कार्यालय और राष्ट्रपति सचिवालय तक कई बार लिखित शिकायतें भेजीं। उनका दावा है कि कई बार उच्च स्तर से स्थानीय प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
दस्तावेजों के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय से भी जिलाधिकारी सम्भल को प्रकरण का नियमानुसार निस्तारण कर कार्रवाई से शिकायतकर्ता को अवगत कराने के निर्देश भेजे गए थे। इसके बावजूद शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कथित अतिक्रमण लंबे समय तक बना रहा और संबंधित अधिकारियों की उदासीनता के कारण सरकारी भूमि को कब्जामुक्त नहीं कराया गया।
मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब राजस्व न्यायालय, तहसील गुन्नौर में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के अंतर्गत ग्राम सभा समशपुर गंगा बनाम सतवीर सिंह आदि वाद की सुनवाई हुई। उपलब्ध आदेश के अनुसार, 13 जुलाई 2024 को असिस्टेंट कलेक्टर प्रथम श्रेणी एवं पीठासीन अधिकारी, गुन्नौर ने लेखपाल की रिपोर्ट और अभिलेखों के आधार पर प्रतिवादी सतवीर सिंह चिकारा को ग्राम समाज की भूमि से बेदखल करने का आदेश पारित किया। आदेश में 1,20,500 रुपये हर्जाना तथा 3,000 रुपये निष्पादन शुल्क भी आरोपित किया गया तथा राजस्व निरीक्षक को नियमानुसार बेदखली की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
हालांकि शिकायतकर्ताओं का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी यदि मौके पर पूरी तरह कार्रवाई नहीं हुई है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के कारण सरकारी भूमि आज भी पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकी है। उन्होंने दोषी अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने और न्यायालय के आदेश का तत्काल पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम समाज की भूमि गांव की सार्वजनिक संपत्ति होती है, जिस पर अवैध कब्जा केवल सरकारी व्यवस्था को चुनौती नहीं बल्कि ग्रामीणों के अधिकारों का भी हनन है। उनका कहना है कि यदि ऐसे मामलों में समय पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी तो भू-माफियाओं के हौसले लगातार बढ़ते रहेंगे।
उधर प्रशासन की ओर से इस संबंध में ताजा आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं राजस्व न्यायालय का आदेश उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार पारित किया जा चुका है। अब स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि न्यायालय के आदेश का पूर्ण पालन कब तक सुनिश्चित कराया जाएगा और ग्राम समाज की भूमि को पूरी तरह कब्जामुक्त कराने की प्रक्रिया कब पूरी होगी।

