रायबरेली। जिले की एक युवती ने अपने पिता पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। युवती का कहना है कि 9 जून 2026 की रात उसके पिता ने उसके साथ अश्लील और आपत्तिजनक हरकत करने का प्रयास किया, मारपीट की, गाली-गलौज की और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। घटना के बाद वह इतनी भयभीत हो गई कि अगले दिन 10 जून को घर छोड़कर चली गई। अब युवती का आरोप है कि मामले में शिकायत किए जाने के बावजूद उसे अभी तक अपेक्षित कानूनी राहत नहीं मिली है और उसके माता-पिता द्वारा उसे धमकाने तथा उसकी मदद करने वाले लोगों के खिलाफ शिकायत किए जाने से वह लगातार परेशान है।
युवती हर्षी सिंह के अनुसार, घटना के बाद उसने अपनी मामी, श्रद्धा सिंह और परिचित श्रीश तिवारी को पूरी घटना की जानकारी दी। सुरक्षा के लिए वह रायबरेली के शिवाजी नगर स्थित ललितांचल हॉस्टल में रहने लगी। युवती का कहना है कि वहां कुछ समय रहने के बाद भी उसे परिवार की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इसके बाद परिचित श्रीश तिवारी की मदद से वह अमेठी में उनकी मां सरोज तिवारी के पास चली गई और करीब एक महीने तक वहां रही।
डर के कारण तत्काल नहीं कर पाई शिकायत
हर्षी का कहना है कि घटना के बाद वह बेहद डरी हुई थी। परिवार की बदनामी और पिता के खिलाफ कार्रवाई कराने को लेकर मानसिक दबाव के कारण उसने तत्काल पुलिस में शिकायत नहीं की। करीब एक महीने तक अमेठी में रहने के दौरान जब उसे कुछ सुरक्षा और मानसिक राहत महसूस हुई तो उसने मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया।
5 अगस्त को पुलिस अधीक्षक को दिया प्रार्थना पत्र
पीड़िता के मुताबिक, उसने 5 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर अपने साथ हुई कथित घटना की जानकारी दी और एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की। शिकायत में उसने पिता पर यौन उत्पीड़न के प्रयास, मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और लगातार धमकियां देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने अपनी सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के साथ-साथ नौकरी को किसी भी प्रकार की प्रताड़ना अथवा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से सुरक्षित रखने की मांग भी की है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि उसके माता-पिता ने उसकी स्वयं की कमाई से खरीदे गए कपड़े, किताबें और अन्य सामान अपने पास रख लिए हैं तथा उन्हें वापस करने से इनकार किया जा रहा है। युवती का आरोप है कि उसके पढ़ाई-लिखाई से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी उसके पिता के पास हैं, जिन्हें उसे वापस नहीं दिया जा रहा है।
रक्षाबंधन पर घर गई तो फिर मारपीट का आरोप
पीड़िता के अनुसार, वह 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर अपने घर गई थी। उसका आरोप है कि वहां भी उसके साथ मारपीट की गई और उसके दस्तावेज वापस नहीं किए गए। इसके बाद वह और अधिक भयभीत हो गई और परिवार से दूरी बनाए रखते हुए अपनी रोजी-रोटी और सुरक्षा का इंतजाम करने लगी।
स्कूल में नौकरी मिली तो वहां भी शिकायत पहुंचाने का आरोप
युवती का कहना है कि परिचित की मदद से उसे लक्ष्मी पब्लिक स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम मिला। वह अपनी आजीविका चलाने के लिए नौकरी करने लगी, लेकिन आरोप है कि उसके पिता ने स्कूल में भी उसके चरित्र को लेकर कथित रूप से शिकायत की। युवती का कहना है कि उसके माता-पिता जहां भी वह रहने या मदद लेने की कोशिश करती है, वहां उसके खिलाफ शिकायत कर देते हैं, जिससे उसकी नौकरी और सुरक्षित जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
हॉस्टल में भी रहने से रोकने की शिकायत
हर्षी के मुताबिक, जिस हॉस्टल में वह सुरक्षा के लिए रह रही थी, वहां भी उसके माता-पिता की ओर से शिकायत की गई और कथित तौर पर हॉस्टल प्रबंधन से उसे वहां नहीं रखने की बात कही गई। पीड़िता का कहना है कि इससे उसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उसका आरोप है कि जो लोग उसकी मदद करने की कोशिश करते हैं, उनके खिलाफ भी उसके पिता शिकायत कर देते हैं।
मदद करने वाले परिचित के खिलाफ भी शिकायत का दावा
शिकायत में एक परिचित श्रीश तिवारी का भी उल्लेख किया गया है, जिनसे युवती ने 10 जून को संपर्क कर घटना की जानकारी दी थी। युवती के अनुसार, उन्होंने केवल मानवीय आधार पर उसकी सुरक्षा में मदद की और उसे अपनी मां के पास अमेठी भेजने में सहयोग किया। युवती का आरोप है कि इसके बावजूद उसके माता-पिता ने उनके खिलाफ भी शिकायत की, जिससे मदद करने वाले लोग भी परेशानी में आ गए।
आरटीआई के जरिए मिली जानकारी, अब निष्पक्ष जांच की मांग
मामले से संबंधित दस्तावेजों में यह भी सामने आया है कि हर्षी सिंह ने 29 अगस्त 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन किया था, जो 2 सितंबर को कार्यालय में प्राप्त हुआ। अपर पुलिस अधीक्षक, रायबरेली के नोडल जनसूचना अधिकारी की ओर से 7 सितंबर 2026 को जारी पत्र में बताया गया कि मांगी गई सूचना क्षेत्राधिकारी नगर कार्यालय से प्राप्त हुई है और उसकी छायाप्रतियां आवेदिका को भेजी जा रही हैं।
पीड़िता की मांग- कानून के अनुसार हो कार्रवाई
हर्षी सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि उसके द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के प्रयास, मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और धमकियों के आरोपों की तत्काल और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उसने कहा है कि वह कानून से बाहर किसी कार्रवाई की मांग नहीं कर रही, बल्कि केवल निष्पक्ष जांच, सुरक्षा और कानून के अनुसार न्याय चाहती है।
युवती का कहना है कि वह वर्तमान में अपनी जिंदगी दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रही है, लेकिन लगातार शिकायतों, धमकियों, दस्तावेज नहीं मिलने और नौकरी प्रभावित होने के कारण वह मानसिक दबाव में है। उसने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मामले में निष्पक्ष जांच कराने, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और जांच पूरी होने तक उसकी नौकरी तथा सम्मान की रक्षा करने की गुहार लगाई है।
मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी। अब पीड़िता की नजर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर है कि उसकी शिकायत पर कानून के अनुसार कब और क्या कदम उठाया जाता है।

