खेत की मेड़ को लेकर खूनी संघर्ष, लाठी-डंडों से हमला; पीड़ित बोला– जान से मारने की धमकी, पुलिस ने FIR तक नहीं लिखी

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धार/कुक्षी।
जिले के कुक्षी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम भैसलाय (सोल्यापुरा) से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां खेत की मेड़ (सेंडे का पत्थर) को लेकर हुए विवाद में एक किसान के साथ बेरहमी से मारपीट किए जाने का आरोप है। पीड़ित ने न केवल गंभीर हमले की शिकायत की है, बल्कि पुलिस पर भी एफआईआर दर्ज न करने और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला अब मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक पहुंच चुका है, फिर भी कार्रवाई लंबित बताई जा रही है।

पीड़ित बलराम पिता मोहन देसाई भिलाला (27 वर्ष) निवासी ग्राम भैसलाय, तहसील कुक्षी, जिला धार ने बताया कि उसका खेत आरोपी राजु बामनिया पिता भंगड़ा के खेत से लगा हुआ है। 12 नवंबर 2025 की सुबह करीब 8 बजे जब वह अपने खेत पर काम कर रहा था, तब उसने देखा कि खेत की सीमा तय करने वाला पत्थर उखाड़ दिया गया है।

जब बलराम ने इस बारे में राजु बामनिया के बेटे अजय से सवाल किया तो वह गाली-गलौज करने लगा और देखते ही देखते लात-घूंसे से मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि कुछ ही देर में अजय की मां कनीबाई और पिता राजु बामनिया भी मौके पर पहुंचे और हाथों में लकड़ी के डंडे लेकर बलराम पर हमला कर दिया।

पीड़ित के अनुसार तीनों ने मिलकर उसे बेरहमी से पीटा, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। घटना के समय उसकी साली निर्मला सहित आसपास के लोग मौजूद थे, जिन्होंने बीच-बचाव कर उसकी जान बचाई। आरोप है कि जाते समय आरोपी परिवार ने उसे जान से मारने की धमकी भी दी।

बलराम का कहना है कि उसने इस घटना की रिपोर्ट थाना कुक्षी में दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने न तो सही धाराओं में मामला दर्ज किया और न ही उसका मेडिकल कराया। मजबूर होकर उसने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसका क्रमांक 35538843 है।

पीड़ित का आरोप है कि जब वह शिकायत की प्रगति जानने थाने पहुंचा तो वहां एक पुलिसकर्मी ने उसका मोबाइल छीनकर हेल्पलाइन शिकायत ही बंद करवा दी और धमकी दी कि ज्यादा बोलोगे तो थाने में बंद कर दूंगा। इसके बाद उसने दोबारा शिकायत क्रमांक 36014174 (दिनांक 24-12-2025) दर्ज कराई, जो फिलहाल “ओपन” स्थिति में बताई जा रही है।

पीड़ित का कहना है कि अब तक न तो एफआईआर दर्ज हुई है, न मेडिकल कराया गया और न ही आरोपियों पर कोई कार्रवाई हुई है। उसने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि उसे न्याय मिल सके।

यह मामला न केवल ग्रामीण स्तर पर बढ़ते भूमि विवाद और हिंसा की तस्वीर दिखाता है, बल्कि पुलिस कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि उच्च अधिकारी इस पूरे प्रकरण में कब तक संज्ञान लेते हैं और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।

 

 

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