हजूरगंज क्षेत्र में बालू निकासी को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों और रैयतों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। जिन किसानों और रैयतों ने अपनी जमीन बालू निकासी के लिए ठेकेदार को दी थी, अब उन्हीं में से कई लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा शुरुआत में बड़े-बड़े वादे और तरह-तरह के प्रलोभन देकर जमीन ली गई, लेकिन बाद में किसानों की समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
ग्रामीणों के अनुसार कई रैयत अब बालू निकासी कार्य से पूरी तरह असंतुष्ट हैं। नाराज किसानों ने अपना आधार कार्ड और मोबाइल नंबर देकर अलग से निर्णय लिया है कि यदि आगे बालू निकासी करनी है तो उनके हिस्से का भुगतान और शेयर अलग किया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद और असंतोष न रहे। किसानों का कहना है कि कुछ लोगों को उचित जानकारी और सहमति दिए बिना जमीन ली गई, जिससे गांव में तनाव की स्थिति बन गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हल्की सड़क बनने से लगभग 3774 दाया क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इसके अलावा तरी पार के किसानों को अब तक फसल और जमीन का समुचित मुआवजा नहीं मिला है। किसानों का कहना है कि बीते वर्ष जिन जमीनों पर बालू निकासी नहीं हुई थी, वहां गरमा फसल और मूंग की खेती की गई थी, लेकिन कार्य के बाद जमीन को आज तक खाली नहीं कराया गया और न ही फसल नुकसान का कोई मुआवजा दिया गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि सड़क निर्माण और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण पानी निकासी का रास्ता पूरी तरह बाधित हो गया है। इससे आसपास की दूसरी जमीनें भी प्रभावित हो रही हैं और खेती करना मुश्किल होता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल स्थल निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।
गांव में बढ़ते असंतोष के बीच ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग किसानों की इस पीड़ा पर कितना गंभीर कदम उठाते हैं।

