मुजफ्फरपुर: नूनू साहनी समेत कई पर जानलेवा हमले का आरोप, पुलिस पर मामले को दबाने का आरोप

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मुजफ्फरपुर जिले में राजीव कुमार पर हुए जानलेवा हमले का मामला गंभीर होता जा रहा है। इस मामले में मुख्य आरोपी नूनू साहनी और अन्य आरोपियों के खिलाफ न्यायालय द्वारा धारा 126 B.N.S.S. के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। हालांकि, अब इस मामले में पुलिस प्रशासन पर भी मामले को दबाने के आरोप लग रहे हैं।

राजीव कुमार का आरोप:

राजीव कुमार ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उनके ऊपर हुए हमले में नूनू साहनी, ज्ञानी, ध्यानी, किशन साहनी, अरुण साहनी, सरवन साहनी और सिकंदर साहनी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि अनंत सिंह पुत्र देवनंदन सिंह इन सभी आरोपियों को पूरा समर्थन दे रहे हैं। राजीव का आरोप है कि अनंत सिंह पैसे और राजनीतिक दबाव के दम पर पुलिस और प्रशासन को भी अपने पक्ष में कर लेते हैं।

राजीव ने यह भी कहा कि पुलिस प्रशासन मामले की गंभीरता को नजरअंदाज कर रहा है और इसे दबाने की कोशिश कर रहा है। उनका दावा है कि उनके भाई को झूठे आरोपों में जेल भिजवाया गया और उनका घर भी तोड़ दिया गया।

न्यायालय का आदेश:

न्यायालय अनुमंडल दंडाधिकारी, पूर्वी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को 09 जनवरी 2025 को सुबह 11:00 बजे न्यायालय में पेश होने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही:

1. सभी आरोपियों से ₹1,00,000 का बंध पत्र लिया जाएगा।

2. शांति भंग की स्थिति में ₹1,00,000 की प्रतिध राशि जमा कराने का भी आदेश दिया गया है।

पुलिस प्रशासन पर सवाल:

राजीव कुमार ने पुलिस प्रशासन पर यह आरोप लगाया है कि वे जानबूझकर इस मामले में आरोपियों का पक्ष ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “पुलिस हमारी शिकायत पर उचित कार्रवाई करने के बजाय मामले को कमजोर करने में लगी है। आरोपियों को खुलेआम घूमने दिया जा रहा है और उनकी गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लगाई गई है।”

प्रशासन की निष्क्रियता पर आक्रोश:

स्थानीय लोगों ने भी पुलिस की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले में आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिससे पुलिस उन पर कार्रवाई करने से कतरा रही है।

राजीव की अपील:

राजीव कुमार ने न्यायालय और उच्च प्रशासन से अपील की है कि मामले को निष्पक्ष तरीके से जांचा जाए और पुलिस प्रशासन पर आरोपियों को संरक्षण देने की जांच की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला, तो उन्हें न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।

निष्कर्ष:

मुजफ्फरपुर का यह मामला प्रशासन और न्यायपालिका के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जहां एक ओर न्यायालय ने मामले में सख्ती दिखाई है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और न्यायालय मिलकर राजीव कुमार को इंसाफ दिलाने में क्या कदम उठाते हैं।

(यह खबर 9 जनवरी 2025 के न्यायालय के आदेश पर आधारित है।)

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