उत्तर प्रदेश से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों में इन दिनों यात्रियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

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हालात ऐसे हैं कि स्लीपर और अन्य आरक्षित कोचों में भी बिना टिकट यात्रियों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। जिन यात्रियों ने महीनों पहले टिकट बुक कर अपनी सीट सुनिश्चित की होती है, उन्हें भी सफर के दौरान अपनी ही सीट पर बैठने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या के बावजूद मामला बड़े स्तर पर सामने नहीं आ पा रहा, क्योंकि अधिकांश यात्री शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं।

यात्रियों का कहना है कि यूपी से दिल्ली की ओर जाने वाली अधिकांश ट्रेनों में भीड़ इस कदर बढ़ चुकी है कि आरक्षित डिब्बों में भी सामान्य कोच जैसी स्थिति बन जाती है। स्लीपर कोचों में बिना टिकट या वेटिंग टिकट लेकर बड़ी संख्या में लोग प्रवेश कर जाते हैं और सीटों, गैलरी तथा गेटों तक पर कब्जा जमा लेते हैं। इससे आरक्षित टिकट लेकर यात्रा कर रहे लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

कई यात्रियों ने आरोप लगाया है कि ट्रेन टिकट परीक्षक यानी टीटीई भी इस समस्या को रोकने में प्रभावी भूमिका नहीं निभा रहे हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में टीटीई यात्रियों से पैसे लेकर उन्हें आरक्षित कोचों में बैठने की अनुमति दे देते हैं, जिससे नियमों की खुली अनदेखी होती है। इससे न केवल रेलवे के नियमों का उल्लंघन होता है, बल्कि टिकट लेकर सफर करने वाले यात्रियों के अधिकारों का भी हनन होता है।

महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों को सबसे अधिक दिक्कत होती है। कई बार सीट आरक्षित होने के बावजूद उन्हें सीट खाली कराने के लिए बहस और विवाद तक करना पड़ता है। रात के सफर में यह परेशानी और गंभीर हो जाती है, जब यात्री आराम करने की कोशिश करते हैं लेकिन भीड़ और अव्यवस्था के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाता।

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरक्षित कोचों में टिकट जांच सख्ती से हो और बिना टिकट यात्रियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए, तो स्थिति में काफी सुधार आ सकता है। साथ ही प्लेटफॉर्म स्तर पर भी चेकिंग व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है ताकि बिना वैध टिकट यात्रियों की एंट्री रोकी जा सके।

यात्रियों का कहना है कि शिकायत करने की प्रक्रिया जटिल होने और तत्काल समाधान न मिलने की वजह से अधिकांश लोग शिकायत दर्ज नहीं कराते। यही कारण है कि यह गंभीर समस्या लगातार बनी हुई है और उच्च स्तर तक इसकी वास्तविक तस्वीर नहीं पहुंच पा रही है।

अब जरूरत है कि Indian Railways और Ministry of Railways इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष अभियान चलाएं, टीटीई की जवाबदेही तय करें और आरक्षित कोचों में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करें। यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है।

ई खबर मीडिया से निर्भय सिंह की रिपोर्ट

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