आगरा/कन्नौज।
आगरा के थाना रकाबगंज क्षेत्र से जुड़ा पति-पत्नी का पारिवारिक विवाद अब कानूनी और सामाजिक बहस का विषय बनता जा रहा है। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद अब न्यायालय, पुलिस और परिवार न्यायालय की काउंसलिंग प्रक्रिया तक पहुंच चुके हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, जबकि सच्चाई की परतें जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही साफ हो सकेंगी।
थाना रकाबगंज, जिला आगरा निवासी विप्लव विश्वास (32 वर्ष) पुत्र विजेंद्र विश्वास का कहना है कि उनका विवाह करीब साढ़े नौ वर्ष पूर्व वर्षा रानी (28 वर्ष) से हुआ था। इस दंपति की दो बेटियां हैं, जिनकी उम्र क्रमशः लगभग 8 वर्ष और 3 वर्ष बताई जा रही है।
डेढ़ साल से अलग रह रही हैं पत्नी, परिवार न्यायालय में चल रही काउंसलिंग
विप्लव विश्वास के अनुसार, उनकी पत्नी करीब डेढ़ से पौने दो साल पहले अपनी मां सुलेखा रानी के पास मायके चली गई थीं। पत्नी का मायका अशोकनगर, बताशे वाली गली, गोसाईगंज, जिला कन्नौज (उत्तर प्रदेश) बताया गया है। पति का दावा है कि इस अवधि के दौरान मामला परिवार न्यायालय में लंबित रहा और डेढ़ साल से अधिक समय तक काउंसलिंग (सुलह-समझौता प्रक्रिया) चलती रही।
पति का कहना है कि काउंसलिंग के दौरान पत्नी समय-समय पर बच्चों के साथ ससुराल आती-जाती रही थीं और किसी प्रकार की गंभीर मारपीट या जानलेवा विवाद जैसी स्थिति सामने नहीं आई थी।
16 दिन पहले दर्ज हुआ आपराधिक मुकदमा
विप्लव विश्वास का आरोप है कि करीब 16 दिन पहले अचानक उनकी पत्नी ने उन पर और उनके परिवारजनों पर दहेज उत्पीड़न, मारपीट, मानसिक प्रताड़ना और भरण-पोषण न देने जैसे आरोप लगाते हुए आपराधिक मुकदमा दर्ज करा दिया। पति का कहना है कि यह मुकदमा उस समय दर्ज कराया गया, जब मामला पहले से परिवार न्यायालय में विचाराधीन था।
उनका आरोप है कि मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्हें थाने में बैठाया गया, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ा।
एलुमनी और आर्थिक दबाव का आरोप
विप्लव विश्वास का यह भी दावा है कि मुकदमे के जरिए उन पर एलुमनी (भरण-पोषण) के नाम पर अपने और दोनों बेटियों के लिए भारी रकम देने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि उन पर चरित्र से जुड़े आरोप, लड़कीबाजी और गलत गतिविधियों में शामिल होने जैसे आरोप भी लगाए गए, जिन्हें वह पूरी तरह निराधार बताते हैं।
सास पर गंभीर आरोप, दूसरी शादी का दावा
पति ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पत्नी की मां सुलेखा रानी कथित रूप से उनकी बेटी वर्षा रानी की दूसरी शादी करवाना चाहती हैं, और इसी उद्देश्य से उन्हें कानूनी मामलों में फंसाकर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पत्नी का पक्ष: असुरक्षा और भरण-पोषण की जरूरत
वहीं दूसरी ओर, पत्नी वर्षा रानी का कहना है कि वह और उनकी बेटियां असुरक्षित महसूस कर रही हैं। उनका दावा है कि उन्हें और बच्चों को भरण-पोषण की तत्काल आवश्यकता है और इसी कारण उन्होंने कानूनी कदम उठाए हैं। पत्नी की ओर से लगाए गए दहेज और उत्पीड़न के आरोपों की जांच फिलहाल संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
जांच और अदालत पर टिका मामला
फिलहाल यह पूरा विवाद पति-पत्नी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है। पुलिस जांच, परिवार न्यायालय की कार्यवाही और अदालत के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और कितने निराधार हैं।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि पारिवारिक विवादों में संवाद, काउंसलिंग और कानून की भूमिका कितनी अहम है, और जल्दबाजी में उठाए गए कदम किस तरह दोनों पक्षों के लिए सामाजिक और मानसिक संकट का कारण बन सकते हैं।
—

