फर्जी बैनामा कांड: सारण में पैतृक जमीन हड़पने की साजिश, दस्तावेज़ों की जालसाजी का आरोप

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सारण जिले के अमनौर थाना क्षेत्र के धरहरा कला मौजा में जमीन हड़पने की एक बड़ी साजिश सामने आने से इलाके में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि पैतृक और बहुमूल्य भूमि पर कब्जा जमाने के लिए फर्जी बैनामा, कूटरचित कागजात, जाली हस्ताक्षर और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी तक कर दी गई। पीड़ित परिवार ने इसे सुनियोजित “भू-माफिया नेटवर्क” की चाल बताया है।
शपथपत्र में दावा: जमीन हमारी पैतृक संपत्ति है
मामले में बिंदेश्वरी प्रसाद राय (पिता स्व. हरदेव राउत), निवासी नाथा छपारा थाना दरियापुर ने कार्यपालक दंडाधिकारी के समक्ष शपथपत्र देकर कहा है कि संबंधित जमीन उनके परिवार की पीढ़ियों पुरानी पैतृक संपत्ति धरहरा कला में है।
शपथपत्र के अनुसार यह भूमि—
खाता संख्या: 31
जमाबंदी संख्या: 281
मौजा: धरहरा कला
थाना: अमनौर, जिला: सारण
में दर्ज है और वर्षों से परिवार का दखल-कब्जा बना हुआ है।
दो तारीख, दो बैनामे… और बड़ा खेल!
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जमीन को “बेचने” के नाम पर दो अलग-अलग फर्जी बैनामे तैयार किए गए—
28 जून 2021
24 दिसंबर 2024
पीड़ितों का कहना है कि इन बैनामों से उनका कोई संबंध नहीं, बल्कि ये पूरी तरह जाली और कानून के खिलाफ हैं। साथ ही जिन लोगों ने जमीन बेचने का दावा किया, उनके पास ऐसा करने का कोई वैध अधिकार नहीं था।
लगान रसीदें और जमाबंदी पेश, मालिकाना हक का सबूत
परिवार ने अदालत में राजस्व रसीदें और जमाबंदी रिकॉर्ड जमा कर यह दिखाने की कोशिश की है कि जमीन पर उनका हक और कब्जा वास्तविक है।
बताया गया कि 2014-15 से 2024-25 तक लगातार लगान जमा किया गया है और दस्तावेजों के मुताबिक जमाबंदी पीड़ित पक्ष के नाम पर कायम है। इसके बावजूद फर्जी कागजात के सहारे जमीन बेचने और कब्जा करने की कोशिश की गई।
खेती करने वालों को बेदखली की धमकी
पीड़ितों का कहना है कि वे लंबे समय से उक्त जमीन पर खेती-बाड़ी कर रहे हैं और फसल के जरिए परिवार का गुजर-बसर चलता है। लेकिन अब फर्जी बैनामे के सहारे कुछ लोग जमीन पर जबरन कब्जा जमाने लगे हैं और विरोध करने पर बेदखल करने की धमकी दी जा रही है।
अदालत से बड़ी मांग: बैनामा रद्द हो, कब्जे पर रोक लगे
पीड़ित पक्ष ने न्यायालय से मांग की है कि—
जमीन को पैतृक संपत्ति मानते हुए उनका अधिकार सुरक्षित किया जाए।
दोनों कथित बैनामों को शून्य और अवैध घोषित किया जाए।
आरोपियों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा जारी कर भविष्य में हस्तक्षेप पर रोक लगाई जाए।
राजस्व व्यवस्था पर सवाल, प्रशासन की भूमिका भी कटघरे में
इस प्रकरण ने एक बार फिर जमीन रजिस्ट्री सिस्टम और राजस्व प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर ऐसे मामलों में समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भू-माफियाओं के हौसले और बुलंद होंगे।

सारण में अवैध रूप से 20-30 पेड़ काटे, मढोरा थाना से पुलिस पहुंची मौके पर

धरहरा कला मौजा की एक जमीन से अवैध रूप से 20 से 30 पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है। सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पेड़ काटे जा रहे थे, लेकिन पुलिस टीम ने कहा कि “यह कोर्ट का आदेश है, हम इन्हें नहीं रोक सकते।” इस पर पीड़ित परिवार ने आपत्ति जताते हुए मुख्यमंत्री से इंसाफ की गुहार लगाई है।

फिलहाल मामला अदालत में, पूरे इलाके की नजरें फैसले पर
मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं इलाके में यह चर्चा तेज है कि आखिर फर्जी बैनामे के जरिए जमीन हड़पने की कोशिश किस तरह सामने आई और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय हैं।

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