ग्रेटर नोएडा (संवाददाता)।
गौतम बुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा निवासी कुलदीप कुमार वर्मा इन दिनों निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, सप्लायर की मनमानी और शिकायत निवारण प्रणाली की ढिलाई से बुरी तरह परेशान हैं। उनका आरोप है कि 4 जनवरी को डाले गए लेंटर की पकड़ मात्र आठ दिन बाद ही कमजोर पड़ गई और 20 दिन बाद खोलने पर पूरा लेंटर झुक गया। इस घटना में उन्हें करीब 3.30 लाख रुपये का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है, जबकि मानसिक तनाव अलग से झेलना पड़ रहा है।
पीड़ित के अनुसार उन्होंने हबीबपुर रोड स्थित लवली बिल्डर मटेरियल सप्लायर (GST: 09CTETD5966T12X) से अल्ट्राटेक सीमेंट खरीदी थी और उसी से लेंटर डलवाया था। कुलदीप का कहना है कि उन्होंने सीमेंट का भुगतान ऑनलाइन किया था, लेकिन जब वे दुकान पर जाकर बिल मांगने गए तो सप्लायर ने साफ इनकार कर दिया और कहा कि “अब कंपनी ही तुम्हें बिल देगी।” इसे लेकर पीड़ित को और संदेह हुआ कि कहीं गड़बड़ी जानबूझकर तो नहीं की गई।
कुलदीप ने बताया कि शिकायत करने के करीब एक सप्ताह बाद लवली बिल्डर की ओर से एक अधिकारी भेजा गया, जिसने जांच किए बिना यह कहकर मामला टाल दिया कि “सर्दी का मौसम है, लेंटर अभी सूखा नहीं है, इसे ऐसे ही रहने दीजिए।” दूसरे सप्ताह एक और अधिकारी आया, उसने भी वही बात दोहराई और कोई तकनीकी परीक्षण नहीं किया।
आज 1 महीना 3 दिन बीत चुके हैं, लेकिन छत की हालत जस की तस है—लेंटर आज भी झुका हुआ है और कहीं भी पकड़ नहीं आई है। कुलदीप का कहना है कि इस कमजोर छत के कारण भविष्य में मकान गिरने का गंभीर खतरा बना हुआ है, जिससे उनका परिवार डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहा है।
पीड़ित ने बार-बार फोन किया, लेकिन कभी कॉल नहीं उठाई गई और कभी कहा गया कि “कंप्लेंट मेल कर दी गई है।” कई बार जवाब मिला कि “हमारा सीमेंट कई जगह जाता है, कहीं और शिकायत नहीं आई।” इस रवैये से कुलदीप और अधिक परेशान हो गए और उन्होंने स्थानीय प्रशासन, कंपनी और उपभोक्ता मंच तक शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब कुलदीप कुमार वर्मा ने मीडिया के माध्यम से प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की पड़ताल हो और उन्हें हुए नुकसान की भरपाई कराई जाए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आम उपभोक्ताओं का भरोसा पूरी व्यवस्था से उठ जाएगा।
फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और कई अन्य मकान मालिक भी अपनी छतों की मजबूती को लेकर चिंतित हैं। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जबकि पीड़ित न्याय की आस में संघर्ष कर रहे हैं।

