छपरा। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत कर फीस जुटाने वाले एक पिता ने पटना के एक निजी स्कूल की पढ़ाई और फीस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। छपरा जिले के कुचाव गांव निवासी गुड्डू कुमार का आरोप है कि उनके तीन बच्चे पटना स्थित PANGAN KIDS GURUK में पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल में एडमिशन हुए करीब पांच से छह महीने बीत जाने के बाद भी पढ़ाई व्यवस्था उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं है।
गुड्डू कुमार का कहना है कि वह ड्राइविंग का काम करके किसी तरह अपने बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं। उनका सपना है कि उनके तीनों बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल कर आगे बढ़ें। इसी उम्मीद में उन्होंने बच्चों का दाखिला पटना के स्कूल में कराया, लेकिन अब वह स्कूल की व्यवस्था को लेकर परेशान हैं।
एडमिशन के महीनों बाद भी पढ़ाई से संतुष्ट नहीं पिता
पीड़ित अभिभावक के मुताबिक बच्चों का एडमिशन हुए करीब पांच से छह महीने हो चुके हैं। उनका आरोप है कि इस दौरान बच्चों की पढ़ाई उस स्तर पर नहीं हो रही है, जिसकी उम्मीद एक निजी स्कूल से की जाती है। पिता का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई को लेकर वह लगातार चिंतित हैं, क्योंकि सीमित आमदनी के बावजूद वह फीस और अन्य खर्च किसी तरह पूरा कर रहे हैं।
गुड्डू कुमार का आरोप है कि स्कूल की ओर से बच्चों की पढ़ाई के नाम पर उनसे अधिक पैसा लिया जाता है। उनका कहना है कि एक साधारण परिवार के लिए बच्चों की फीस और पढ़ाई से जुड़े अन्य खर्च उठाना आसान नहीं है। इसके बावजूद यदि बच्चों को अपेक्षित शिक्षा नहीं मिले तो अभिभावक के सामने सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है।
बाहर से किताब खरीदने पर भी आपत्ति का आरोप
अभिभावक ने स्कूल पर एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि बच्चे या अभिभावक बाहर से किताब खरीदकर लाते हैं तो स्कूल के शिक्षक कथित तौर पर उन्हें बाहर से किताब नहीं खरीदने की बात कहते हैं। गुड्डू कुमार का कहना है कि किताबों को लेकर भी स्कूल की ओर से स्पष्ट व्यवस्था और पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
ड्राइविंग कर बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे पिता
गुड्डू कुमार का कहना है कि वह स्वयं ड्राइविंग का काम करते हैं और मेहनत की कमाई से तीनों बच्चों को पढ़ा रहे हैं। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद वह बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं रखना चाहते। उनका कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों के बीच बच्चों की फीस जुटाना उनके लिए आसान नहीं है, लेकिन बच्चों के भविष्य को देखते हुए वह लगातार मेहनत कर रहे हैं।
उनकी शिकायत का मुख्य सवाल यही है कि जब अभिभावक अपनी मेहनत की कमाई से बच्चों की फीस चुका रहा है तो बदले में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलना चाहिए। यदि स्कूल की पढ़ाई और फीस व्यवस्था को लेकर अभिभावक असंतुष्ट हैं तो संबंधित प्रबंधन को उनकी शिकायत सुनकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अभिभावक ने व्यवस्था की जांच और समाधान की मांग की
गुड्डू कुमार ने संबंधित शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल में बच्चों की पढ़ाई, फीस और किताबों से संबंधित व्यवस्था की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन या अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव पाया जाता है तो उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल स्कूल प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। अभिभावक का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी को बदनाम करना नहीं, बल्कि अपने तीनों बच्चों के भविष्य के लिए उचित शिक्षा और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कराना है।

