एक व्यक्ति की अजीब किस्म की सनक बंदर के हाथ लगी हल्दी की गांठ वाली कहानी की याद दिलाती है । वे एक खतरनाक खेल में शामिल हो गए हैं । दुर्भाग्य से बगैर कुछ सोचे समझे लगभग समूचा विपक्ष उनके पीछे दुम की तरह लग गया है । बीती रात राहुल गांधी और संदीप दीक्षित ने कांग्रेस के राष्ट्रीय कार्यक्रम में इटली की पीएम मेलोनी का नाम लेकर जो तमाशा किया वह बेहद शर्मसार करने वाला है ।
पता नहीं क्यों , पर उन्हें लगता है कि अपनी मूर्खताओं से इस बार तो तख्ता पलट ही देंगे ? चूंकि सत्ताधारी एनडीए तल्खी का जवाब चुपके चुपके दे रहा है , अतः भाईजान के हौसले बुलंद हैं । उन्हें जो अब लग रहा है , वही 2019 में भी लगा था जब चुनाव परिणाम आने से पूर्व ही उन्होंने अपनी कैबिनेट तक बना ली थी । उन्हें 2024 में भी लगा जो पूरा नहीं हुआ । सच कहें तो 2004 में अटल जी की पराजय के बाद से साहबजादे पीएम इन वेटिंग चल रहे हैं । कोई शख़्स 22 साल किसी पद को न पा सके उसकी मानसिक खिसियाहट , कुंठा और नफ़रत को समझना कठिन नहीं बड़ा आसान है ।
आजकल उसी की परिणिति चल रही है , पटाक्षेप मई 2029 में होगा । माने अरसा अभी लम्बा है , कुर्सी बड़ी दूर है । तो फिर एक ही तरीका है – भले ही जेब में पाकेटबुक रूपी लाल संविधान हो , पर लक्ष्य तो सत्ता छीनना है । मालूम है वोट से नहीं मिलेगी तो किसी भी तरह घोर अराजकता फैलाओ , जनविद्रोह कराओ और छीन लो तख्तोताज । बस यही ख्वाब है यही अहंकार है । हमने 23 दिन संसद नहीं चलने दी , यही गुरूर है , यही राजनीति की उपलब्धि ?
अभी एक दिन एक मित्र ने बड़ा अजीब सा सवाल ट्विटर पर पूछा । उन्होंने पूछा कि यह कैसे हो सकता है ? नेहरू की बेटी गाँधी , दामाद फिरोज भी गांधी , इंदिरा के बेटे गांधी , बहुएं गांधी , राजीव के बेटे गांधी , सोनिया की बेटी गाँधी , बेटी के बच्चे गांधी ! मित्र ने सवाल पूछा कि जब नेहरू की तमाम पीढ़ियां गांधी हैं तो असली महात्मा गांधी के बच्चे क्या हैं ? कहां हैं वे असली गांधी ? कहां है मोहनदास करमचंद गांधी की विरासत ?
खैर ! दो महीने पहले सोशल मीडिया इंस्टाग्राम के गर्भ से पैदा हुए अभिजीत दीपके का खेल भी अब खत्म हुआ समझो । उनका और उनके प्रमुख साथी सौरभ दास तथा रांका का अहंकार संगठन को डकार गया ? देखिए उन्हें मीटिंग करने को कोई हॉल नहीं दे रहा है । एक पार्क में बैठक करनी चाही तो सोसाइटी वालों ने घेरकर भगा दिया । अब बिल्कुल भी नहीं लगता कि दिल्ली पुलिस काकरोच पार्टी और उनकी मेंटर आम आदमी पार्टी को जंतर मंतर पर घुसने भी देगी । दरअसल झारखंड के छात्र आंदोलन ने काकरोच और बाकी विपक्ष की कलई उतार डाली है ।
कुल मिलाकर यही कहेंगे कि पीएम न बन पाने की घनघोर असफलता राहुल गांधी के माध्यम से कांग्रेस को कहीं का नहीं छोड़ेगी । यही वजह है कि उद्धव ठाकरे , शरद पंवार , स्टालिन , केजरीवाल और यहाँ तक कि तेजस्वी ने भी कांग्रेस से दूरी बना ली है । योगी ब्रांड से भयभीत अखिलेश यादव के अलावा विपक्ष का कोई प्रमुख नेता राहुल गांधी के साथ खड़ा नहीं हो रहा है । जो व्यक्ति मंच पर बेहद फूहड़ नाटक मंचन करे , उसकी मानसिकता का घोर पतन शर्मसार करने वाला है ।
एक पूरा मानसून सत्र उनके घोर अहंकार की भेंट चढ़ गया
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