प्रधान को आवास के नाम पर रुपये देने का आरोप, फिर भी पक्के घर का इंतजार
इटावा। ग्राम भगौती निवासी जितेंद्र प्रताप सिंह का परिवार इन दिनों बेहद मुश्किल हालात में जिंदगी गुजारने को मजबूर है। परिवार के पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है और वह झोपड़ी में रहकर अपने बच्चों और परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। हालात उस वक्त बेहद खतरनाक हो गए, जब झोपड़ी में परिवार के बच्चे सो रहे थे और अचानक पूरी झोपड़ी भरभराकर गिर गई।
जितेंद्र के मुताबिक हादसे के समय उनके बच्चे झोपड़ी के अंदर सो रहे थे। अचानक झोपड़ी गिरने से परिवार में चीख पुकार मच गई। गनीमत रही कि बच्चे बाल बाल बच गए। यदि झोपड़ी का मलबा बच्चों के ऊपर गिर जाता तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद से परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वह अपने बच्चों को लेकर जाएं तो जाएं कहां।
आवास योजना का लाभ मिलने की उम्मीद अधूरी
जितेंद्र प्रताप सिंह का आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने की उम्मीद में ग्राम प्रधान को 2000 रुपये भी दिए थे। इसके बावजूद अभी तक उनके परिवार को पक्के मकान का लाभ नहीं मिल सका है। परिवार का कहना है कि लंबे समय से वह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उन्हें सरकारी योजना के तहत एक सुरक्षित आशियाना मिलेगा, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ।
एक कमरा मिले, लेकिन पक्का घर मिले
जितेंद्र का कहना है कि उन्हें किसी आलीशान मकान की जरूरत नहीं है। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि प्रशासन उनके परिवार के लिए एक या दो कमरों का पक्का मकान उपलब्ध करा दे, जिसमें वह अपने बच्चों और परिवार के साथ सुरक्षित रह सकें। उनका कहना है कि गरीब परिवार होने के कारण वह खुद पक्का मकान बनवाने की स्थिति में नहीं हैं।
हादसे के बाद प्रशासन से मदद की गुहार
झोपड़ी गिरने की घटना के बाद परिवार के सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। मासूम बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवार चिंतित है। जितेंद्र प्रताप सिंह ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और पात्रता के आधार पर उन्हें आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
परिवार की गुहार है कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर उनकी स्थिति देखे और जल्द से जल्द सुरक्षित पक्के आशियाने की व्यवस्था करे, ताकि उनके बच्चों को दोबारा किसी हादसे का सामना न करना पड़े।

