उज्जैन के महाकाल मंदिर के पास स्थित मुस्लिम बाहुल्य इलाके बेगम बाग में फिर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई और एक दर्जन से अधिक अवैध बिल्डिंग को जमींदोज कर दिया गया। इस दौरान 50 से अधिक पुलिसकर्मी इलाके में तैनात रहे।
मध्यप्रदेश के उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर के पास बेगम बाग क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा अवैध बिल्डिंगों पर मोहन यादव सरकार की एक बार फिर बुलडोजर कार्रवाई देखने को मिली है। यह मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है जो कि महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग पर है। यह प्रॉपर्टी उज्जैन विकास प्राधिकरण की है, जिसे 30 वर्ष की लीज पर आवासीय उपयोग के लिए दिया गया था। बावजूद इसके यहां धर्म विशेष के लोगों ने नियम विरुद्ध इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था, जिसके चलते सरकार ने ये कार्रवाई की। लीज समाप्ति के बाद लीज का नवीनीकरण नहीं हो सका और जब उज्जैन विकास प्राधिकरण ने नोटिस दिए तो संबंधित लोग न्यायालय पहुंच गए। लोअर कोर्ट, हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद अवैध अतिक्रमण पर अब यह कार्रवाई की जा रही है।
सुबह से शुरू हुई कार्रवाई
बेगम बाग इलाके में आज सुबह मोहन सरकार की बोलडोजर कार्रवाई शुरू हुईः आज सुबह 8 बजे कार्रवाई शुरू की गई, जिसमें करीब 15 बिल्डिगों को ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान पुलिस की भी तैनाती रही और किसी प्रकार का कोई विरोध प्रदर्शन देखने को नही मिला। दरअसल यहां पिछले एक वर्ष के भीतर इसी प्रकार 72 बिल्डिंग को जमीदोंज किया गया था तब जरूर विरोध हुआ था, मगर आज की कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से हुई। जिस जगह बुलडोजर चले, ये इलाका महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग पर ही है।
मुस्लिम बाहुल्य इलाके में चला बुलडोजर
बेगम बाग एक मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है, जिसके कारण इसे अति संवेदनशील क्षेत्र माना गया है। इसलिए यह रास्ता वाहनों और श्राद्धलुओं के लिए पूरी तरह बन्द कर दिया गया है। वैकल्पिक मार्गों का उपयोग किया जा रहा है। दरअसल, पूरा मामला इस प्रकार है कि उज्जैन विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1985 में बेगम बाग क्षेत्र में 48 भूखंड आवासीय तौर पर 30 साल की लीज पर दिए थे। भूखंड धारकों ने इन भूखंडों का उपयोग आवासीय तौर पर करने की बजाय पूरी तरह व्यावसायिक तौर पर कर लिया। जो कि नियम विरुद्ध था। इसके साथ ही वर्ष 2014-15 में लीज भी समाप्त हो गई। जिसे नवीनीकरण भी नहीं कराया गया।
कानूनी प्रक्रिया के तहत तोड़ी जाएंगी अन्य बिल्डिंग
भूखंडों को लेकर उज्जैन विकास प्राधिकरण ने लगातार नोटिस दिए। वर्ष 2023-24 में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने भूखंड धारकों की लीज समाप्त कर दी । जिसको लेकर भूखंड धारक न्यायालय पहुंचे जहां उन्हें स्टे मिल गया। इन भूखंडों का अलग-अलग न्यायालय में मामला विचाराधीन रहा। न्यायालय का स्टे हटते ही तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गई । यहां पूर्व में भी सात चरणों मे करीब एक वर्ष के भीतर 72 बिल्डिंगों को हटाया गया था। खास बात तो यह है की जहां कार्रवाई हो रही है ऐसे 48 भूखंड है जिन्हें उज्जैन विकास प्राधिकरण ने आवंटित किए थे। जिनमें प्रत्येक की साइज करीब 2400 स्क्वेयर फीट थी। भूखंड धारकों ने इनके अलग-अलग टुकड़े कर करीब 106 बिल्डिंग बना ली। अब तक 106 में से 86 बिल्डिंग को जमीदोंज किया गया है शेष 20 बिल्डिंगों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत तोड़ा जाएगा।
न्यायालय ने खारिज कर दिया था स्टे
आज जिन बिल्डिंगों पर कार्रवाई की जा रही है न्यायालय ने इनका स्टे खारिज कर दिया था । इसके बाद विकास प्राधिकरण की ओर से नोटिस दिया गया था जिनकी समय सीमा समाप्त हो गई। भवन मालिको से बातचीत की गई और उन्हें न्यायालय प्रक्रिया के बारे में समझाया गया। इसके बाद उन्होंने स्वतः अपनी बिल्डिंग खाली करना शुरू कर दी। इसलिए यह कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से चल रही है। आज जिन लोगों की बिल्डिंग को जमींदोज किया गया उनमें शकीला बी, मेहरुनिशा, इरशाद, बाब मलंग शाह, फरीजा बी, नजमा बी, जावेद खान, अफसाना बी, शमीम बी, इशरत जहां, मो. रईस खान, हफीजुरहमान, जाकिर भाई और मो. सब्बीर के के नाम शामिल हैं।

