इ खबर रिपोर्टर – मोइनुद्दीन कुरैशी
चित्तौड़गढ़, 29 दिसंबर।
बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन को लेकर चलाए जा रहे “बाल विवाह मुक्त भारत” 100 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान के तहत रविवार को चित्तौड़गढ़ में आयोजित राष्ट्रीय स्वदेशी मेले के दौरान एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर बाल अधिकारिता विभाग द्वारा तैयार किए गए बाल विवाह निषेध जागरूकता पोस्टर का विधिवत विमोचन किया गया।
पोस्टर का विमोचन राज्य के शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर, चित्तौड़गढ़ सांसद श्री सी.पी. जोशी एवं विधायक श्री चंद्रभान सिंह आक्या द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने बाल विवाह रोकने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी को आवश्यक बताया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि बाल विवाह न केवल बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है, बल्कि यह समाज के समग्र विकास में भी बड़ी बाधा है। सरकार द्वारा चलाया जा रहा 100 दिवसीय अभियान जन-जागरूकता के माध्यम से इस कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही बाल विवाह रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है और इसके लिए अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
सांसद श्री सी.पी. जोशी ने कहा कि बाल विवाह के दुष्परिणामों को लेकर समाज में व्यापक जागरूकता की आवश्यकता है। ऐसे अभियान ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सकारात्मक संदेश देने का कार्य करते हैं। उन्होंने बाल अधिकारिता विभाग की पहल की सराहना करते हुए कहा कि पोस्टर जैसे माध्यम आमजन को सरल भाषा में कानून और बच्चों के अधिकारों की जानकारी देते हैं।
विधायक श्री चंद्रभान सिंह आक्या ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक अपराध है, जिसे रोकना केवल प्रशासन का नहीं बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। उन्होंने युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से आगे आकर इस अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।
इस अवसर पर बाल अधिकारिता विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में मेले में आए नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को बाल विवाह निषेध कानून, हेल्पलाइन नंबरों एवं जागरूकता संदेशों की जानकारी भी दी गई।
राष्ट्रीय स्वदेशी मेले जैसे बड़े आयोजन में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम से आमजन तक संदेश पहुंचाने में मदद मिलेगी और चित्तौड़गढ़ जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

