सालासर (चूरू)
मुनाफे की अंधी दौड़ इंसान को किस हद तक गिरा सकती है, इसकी एक और भयावह मिसाल सालासर क्षेत्र में सामने आई है। नकली घी का अवैध कारोबार एक बार फिर उजागर हुआ है, जिसने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक भोली-भाली जनता को ज़हर परोसा जाता रहेगा।
आपकी थाली में परोसा जा रहा घी असली है या नकली—अब इसका फर्क करना आम आदमी के लिए लगभग नामुमकिन होता जा रहा है। खाने-पीने की बुनियादी चीज़ों में इस तरह की मिलावट सीधे-सीधे लोगों की सेहत से खिलवाड़ है, लेकिन इसके बावजूद यह धंधा बेखौफ जारी है।
नेशनल हाईवे पर होटल से 7500 किलो नकली घी बरामद
हाल ही में करीब एक सप्ताह पहले AGTF (एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स) की टीम ने सालासर के निकटवर्ती नेशनल हाईवे पर स्थित एक होटल पर छापा मारकर करीब 7500 किलो नकली घी बरामद किया। यह घी न केवल होटल में इस्तेमाल किया जा रहा था, बल्कि स्थानीय बाजार में भी सप्लाई किए जाने की आशंका जताई जा रही है।
जांच में सामने आया कि यह घी बेहद खतरनाक रसायनों और सस्ते तेलों को मिलाकर तैयार किया गया था, जिसे असली देसी घी के नाम पर बेचा जा रहा था। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का नकली घी लंबे समय तक सेवन करने से लीवर, हार्ट और पाचन तंत्र से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।
दो साल पहले भी हो चुकी है कार्रवाई, फिर क्यों नहीं रुका कारोबार?
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिस व्यक्ति के यहां से यह नकली घी बरामद हुआ, उसके खिलाफ करीब दो साल पहले भी नकली घी के मामले में कार्रवाई हो चुकी है। इसके बावजूद न तो उसके हौसले टूटे और न ही यह अवैध कारोबार बंद हुआ।
इससे साफ सवाल उठता है कि
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क्या पिछली कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई?
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क्या मिलावटखोरों को कानून का डर ही नहीं रहा?
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या फिर कहीं न कहीं सिस्टम की ढिलाई उन्हें दोबारा यह ज़हर फैलाने का मौका दे रही है?
सेहत से समझौता, लेकिन जिम्मेदारी कौन लेगा?
नकली घी केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सीधा हमला है। बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग सबसे ज्यादा इसकी चपेट में आते हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब बार-बार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, तो स्थायी और सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते ऐसे मिलावटखोरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह कारोबार और भी गहराई तक फैल जाएगा।
प्रशासन से उठी सख्त कार्रवाई की मांग
इस मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र में आक्रोश है। लोग मांग कर रहे हैं कि
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नकली घी के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए
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ऐसे आरोपियों की संपत्ति जब्त की जाए
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और खाद्य पदार्थों की नियमित व सख्त जांच सुनिश्चित की जाए
क्योंकि सवाल सिर्फ नकली घी का नहीं है, सवाल है हर उस थाली का, जिसमें मिलावट का ज़हर परोसा जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बार सिर्फ कार्रवाई दिखाता है या सच में जनता की सेहत की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाता है।

