बांका।
बिहार के बांका जिले के बेलसिरा क्षेत्र से भूमि विवाद और कथित प्रशासनिक अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित भोगता मुकेश कुमार यादव, उनके भाई सियाराम यादव और ललन कुमार यादव ने आरोप लगाया है कि उनकी पुश्तैनी जमीन को गलत तरीके से दूसरे पक्ष के पक्ष में दर्ज कर दिया गया है। परिवार का दावा है कि उनके पास जमीन से संबंधित पुराने दस्तावेज, बंदोबस्ती रिकॉर्ड, मालगुजारी रसीदें और अन्य राजस्व अभिलेख मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है।
पीड़ित परिवार के अनुसार उनके पिता स्वर्गीय फुल्कीत प्रसाद यादव के नाम से दर्ज पुश्तैनी भूमि पर वर्षों से उनका अधिकार रहा है। इसी जमीन पर खेती कर परिवार का भरण-पोषण होता था, लेकिन अब कथित रूप से प्रभावशाली लोगों द्वारा कब्जा कर लिए जाने से उनका जीवन संकट में पड़ गया है।
मुकेश कुमार यादव ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मामले की जांच के दौरान संबंधित प्रशासनिक अधिकारी ने कथित रूप से रिश्वत लेकर गलत प्रतिवेदन तैयार कर दिया। पीड़ित का दावा है कि लगभग 5 लाख रुपये लेकर वास्तविक तथ्यों को नजरअंदाज किया गया और उनके पक्ष में मौजूद दस्तावेजों को महत्व नहीं दिया गया।
परिवार का कहना है कि उन्होंने जांच के दौरान सभी आवश्यक कागजात प्रस्तुत किए थे, जिनसे यह साबित होता है कि जमीन उनके पूर्वजों की है। इसके बावजूद कथित रूप से गलत रिपोर्ट बनाकर उनके अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास किया गया।
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि विपक्षी पक्ष के वकील यादव, राम लखन, मुख्तियार यादव तथा अन्य लोग मिलकर उनकी जमीन पर कब्जा जमाए हुए हैं। परिवार का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वे अपनी ही भूमि का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं और उन्हें खेत में प्रवेश तक करने से रोका जाता है।
उनका दावा है कि जमीन पर कब्जे के कारण खेती पूरी तरह ठप हो गई है और परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है
मुकेश कुमार यादव का कहना है कि उन्होंने कई बार अंचल कार्यालय, राजस्व विभाग और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। उनका आरोप है कि मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्रवाई टाल दी गई।
परिवार का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच हुई होती तो उन्हें वर्षों तक न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ता।
पीड़ित परिवार ने स्थानीय सरपंच और मुखिया पर भी विपक्षी पक्ष का साथ देने का आरोप लगाया है। परिवार का दावा है कि पंचायत स्तर पर उनकी समस्याओं को अनदेखा किया गया और उन्हें न्याय दिलाने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश की गई।
मुकेश कुमार यादव का कहना है कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र साधन थी। जमीन पर कब्जा होने के बाद परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्च और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना भी कठिन होता जा रहा है।
परिवार का कहना है कि वे आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि हर स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ सकें या लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाते रहें।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि विपक्षी पक्ष प्रभावशाली है और इसी कारण वे लगातार भय के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहे हैं। परिवार को आशंका है कि विरोध करने पर उन्हें और अधिक परेशान किया जा सकता है।
मुकेश कुमार यादव ने प्रशासन से सुरक्षा प्रदान करने तथा उनकी पुश्तैनी जमीन पर पुनः कब्जा दिलाने की मांग की है।
पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि बंदोबस्ती दस्तावेज, मालगुजारी रसीदें और पुराने राजस्व अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है।
मुकेश कुमार यादव का कहना है कि उनकी मांग केवल इतनी है कि उन्हें उनकी पुश्तैनी जमीन वापस दिलाई जाए ताकि उनका परिवार दोबारा खेती कर सके और सम्मानजनक जीवन जी सके।
अब यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, भ्रष्टाचार और ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।#MukeshKumarYadav
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